EV Fire vs Petrol Car: पिछले कुछ सालों से हमारे देश में इलेक्ट्रिक गाड़ियों की डिमांड तेजी से बढ़ी है. इसका सबसे बड़ा कारण पेट्रोल और डीजल के दामों में लगातार इजाफा होना. इलेक्ट्रिक गाड़ियां अब आसानी से भारत में मिल रही हैं और तेजी से चार्जिंग स्टेशन भी खुल रहे हैं. लेकिन इलेक्ट्रिक गाड़ियों में आग लगने के घटनाएं भी देखने को मिली हैं. हालांकि, यह बात बहुत कम लोग जानतें हैं कि अगर किसी इलेक्ट्रिक कार में आग लगती है तो उसे बुझाना बेहद मुश्किल होता है. 

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बता दें कि, पेट्रोल कार की आग को जहां कुछ मिनटों में पानी से बुझाया जा सकता है. वहीं ईवी की आग से निपटने का तरीका बिल्कुल अलग होता है. तो चलिए जानते हैं कि इन दोनों की कार आग में ऐसा क्या अंतर है जो फायरमैन के लिए भी बड़ी परेशानी बन जाती है.

थर्मल रनवे है बेहद खतरनाक 

बता दें कि पेट्रोल कार में आग लगने की मुख्य वजह फ्यूल का लीक होना या इंजन का ओवरहीट होना होता है. जिसे ऑक्सीजन की सप्लाई काटकर बुझाया जा सकता है. लेकिन ईवी की आग का मुख्य विलेन थर्मल रनवे होता है. जब इलेक्ट्रिक कार की लिथियम-आयन बैटरी अंदरूनी खराबी या किसी बड़े एक्सीडेंट की वजह से डैमेज होती है.

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तो उसके सेल्स अनियंत्रित रूप से गर्म होने लगते हैं. यह एक ऐसी केमिकल चेन रिएक्शन है जो एक सेल से दूसरे सेल में बहुत तेजी से फैलती है. सबसे खतरनाक बात यह है कि ये बैटरियां जलते समय खुद ही ऑक्सीजन पैदा करती हैं जिससे इस आग को बुझाने के लिए नार्मल तरीके काम नहीं आते.

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डिग्री का भयानक अंतर 

आपको जानकार हैरानी होगी कि, एक सामान्य पेट्रोल कार की आग का तापमान करीब 600 डिग्री फॉरेनहाइट तक पहुंचता है. जिसे काबू करना आसान होता है. वहीं थर्मल रनवे पर पहुंची ईवी की बैटरी का तापमान 1200 से 2000 डिग्री फॉरेनहाइट से भी ऊपर चला जाता है. इतनी भीषण गर्मी में बैटरी पैक फटने लगता है और उससे रॉकेट जैसी लपटें और धमाके होते हैं. 

जबकि इसके अलावा ईवी की आग से हाइड्रोजन फ्लोराइड जैसी बेहद जहरीली और जानलेवा गैसें निकलती हैं. जिससे वहां मौजूद लोगों और राहतकर्मियों के फेफड़ों को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है. इसी वजह से ईवी की आग को बुझाते समय स्पेशल रेस्पिरेटर मास्क की जरूरत पड़ती है.

लग जाता है हजारों लीटर पानी 

बता दें कि, पेट्रोल कार की आग को बुझाने के लिए मुश्किल से 1 से 2 हजार लीटर पानी काफी होता है. लेकिन एक इलेक्ट्रिक गाड़ी की आग को पूरी तरह काबू पाने के लिए 10 हजार से लेकर 40 हजार लीटर तक पानी की जरूरत पड़ सकती है. फायरफाइटर्स को सीधे बैटरी पैक को ठंडा करने के लिए घंटों तक लगातार पानी की बौछार करनी पड़ती है. 

इससे भी ज्यादा हैरान करने वाली बात यह है कि ईवी में स्ट्रैंडेड एनर्जी बची रहती है. इस वजह से आग बुझने के बाद भी कई घंटों या दिनों बाद कबाड़खाने में खड़ी कार की बैटरी अचानक दोबारा सुलग सकती है इसलिए कई देशों में पूरी कार को ही पानी के बड़े टैंक में डुबो दिया जाता है.

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