भारत में इलेक्ट्रिक कारों का क्रेज बहुत तेजी से बढ़ रहा है. मैदानी इलाकों जैसे दिल्ली, मुंबई या बेंगलुरु में तो ईवी कारें धड़ल्ले से दौड़ रही हैं और लोग इन्हें खूब पसंद कर रहे हैं, लेकिन जब बात पहाड़ों की आती है तो आज भी बहुत से लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि क्या इलेक्ट्रिक कारें पहाड़ी रास्तों, चढ़ाइयों और ठंडे मौसम में उतनी ही सफल है? आइए जानते हैं कि पहाड़ों पर इलेक्ट्रिक कारें कितनी कामयाब हैं और पेट्रोल-डीजल गाड़ियों के मुकाबले इनकी क्या स्थिति है.
पहाड़ों पर भी सुपरहिट हैं इलेक्ट्रिक कारें
पहाड़ों की खड़ी चढ़ाई पर अक्सर पेट्रोल और डीजल कारों का इंजन हांफने लगता है. भारी लोड होने पर ड्राइवरों को बार-बार गियर बदलना पड़ता है और कई बार कम टॉर्क के कारण गाड़ियां चढ़ाई पर पीछे की तरफ खिसकने लगती हैं. लेकिन इलेक्ट्रिक कारों के साथ ऐसा बिल्कुल नहीं होता. इलेक्ट्रिक कारों में इंस्टेंट टॉर्क मिलता है. इसका मतलब यह है कि जैसे ही आप एक्सीलेटर दबाते हैं, कार को तुरंत पूरी पावर मिल जाती है. इसके लिए गाड़ी को RPM बढ़ाने या गियर बदलने की जरूरत नहीं होती, क्योंकि ईवी में गियरबॉक्स ही नहीं होता. चाहे कितनी भी खड़ी चढ़ाई हो, इलेक्ट्रिक कार बिना किसी शोर या कंपन के बहुत ही स्मूथली ऊपर चढ़ जाती है. परफॉर्मेंस के मामले में ईवी कारें पहाड़ों पर पेट्रोल-डीजल से कहीं ज्यादा आगे और दमदार साबित होती है.
ब्रेकिंग तकनीक से खुद चार्ज होती है बैटरी
पहाड़ों पर इलेक्ट्रिक कारों का एक सबसे जादुई और बड़ा फायदा Regenerative Braking तकनीक है. जब आप पहाड़ों से नीचे की तरफ आते हैं, तो पेट्रोल और डीजल कारों में लगातार ब्रेक दबाना पड़ता है, जिससे ब्रेक पैड गर्म होकर खराब होने का डर रहता है और ईंधन भी बर्बाद होता है. इसके विपरीत, इलेक्ट्रिक कार जब पहाड़ों से नीचे उतरती है तो जैसे ही आप एक्सीलेटर से पैर हटाते हैं, गाड़ी की मोटर उल्टी घूमने लगती है. यह मोटर एक जनरेटर की तरह काम करती है और उतराई की ऊर्जा को बिजली में बदलकर कार की बैटरी को खुद-ब-खुद चार्ज करने लगती है. कई बार देखा गया है कि 20 किलोमीटर की उतराई तय करने में इलेक्ट्रिक कार की बैटरी 5 से 10 फीसदी तक वापस चार्ज हो जाती है, जो कि पेट्रोल-डीजल गाड़ियों में सोच पाना भी नामुमकिन है.
यह भी पढ़ें: Duster हाइब्रिड भारत में लॉन्च, 16.9 लाख कीमत और 29kmpl का तगड़ा माइलेज
चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, पहाड़ों पर आज भी है असली परीक्षा
पेट्रोल और डीजल कारों की सबसे बड़ी ताकत यह है कि पहाड़ों के सुदूर इलाकों में भी आपको हर कुछ किलोमीटर पर पेट्रोल पंप मिल जाते हैं. गाड़ी का तेल खत्म होने पर आप 5 मिनट में टंकी फुल कराकर आगे बढ़ सकते हैं. हालांकि, इलेक्ट्रिक कारों के लिए पहाड़ों पर चार्जिंग स्टेशनों का नेटवर्क आज भी बहुत कमजोर है.
हिमाचल, उत्तराखंड या कश्मीर के मुख्य पर्यटन शहरों में तो फास्ट चार्जर मिलने लगे हैं, लेकिन जैसे ही आप ऊंचाई वाले इलाकों में जाते हैं, फास्ट चार्जिंग स्टेशन ढूंढना बेहद मुश्किल हो जाता है. अगर आप होटल के नॉर्मल थ्री-पिन प्लग से कार चार्ज करते हैं, तो गाड़ी फुल होने में 12 से 15 घंटे का समय लग जाता है, जिससे यात्रा का समय खराब होता है.
यह भी पढ़ें: Ferrari प्रेमियों के लिए खुशखबरी, भारत पहुंचीं दुनिया की सबसे महंगी कारें
Car loan Information:
Calculate Car Loan EMI