Car Ownership Cost: नई कार खरीदते समय ज्यादातर लोग उसकी कीमत, डिजाइन और फीचर्स पर ध्यान देते हैं. लेकिन असली खर्च कार खरीदने के बाद शुरू होता है. कई बार ग्राहक केवल शोरूम या ऑन रोड कीमत देखकर फैसला कर लेते हैं और बाद में उन्हें पता चलता है कि कार चलाने और संभालने में भी हर साल अच्छी-खासी रकम खर्च होती है. ईंधन, सर्विस, इंश्योरेंस, टायर और बैटरी जैसे खर्च धीरे-धीरे जुड़कर बड़ा आंकड़ा बन जाते हैं. 

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यही वजह है कि ऑटो विशेषज्ञ हमेशा कार खरीदने से पहले उसकी कुल ओनरशिप कॉस्ट समझने की सलाह देते हैं. अगर आप भी नई कार खरीदने का प्लान बना रहे हैं, तो यह जानना जरूरी है कि अगले पांच साल में आपकी जेब से वास्तव में कितने रुपये निकल सकते हैं. कई मामलों में कार की कीमत से लाखों रुपये अतिरिक्त खर्च करना पड़ सकता है. इसलिए सही बजट बनाकर ही वाहन खरीदना समझदारी माना जाता है.

ईंधन, सर्विस और इंश्योरेंस में ही खर्च हो जाते हैं लाखों रुपये

मान लीजिए आपने 8 लाख रुपये की एक पेट्रोल कार खरीदी है और हर साल करीब 12,000 किलोमीटर चलाते हैं. ऐसे में ईंधन पर सालाना 60,000 से 80,000 रुपये तक खर्च हो सकते हैं. पांच साल में यह राशि करीब 3 लाख से 4 लाख रुपये तक पहुंच सकती है. इसके अलावा नियमित सर्विस और मेंटेनेंस पर हर साल 8,000 से 15,000 रुपये तक खर्च आ सकता है. यानी पांच साल में करीब 40,000 से 75,000 रुपये केवल सर्विस पर खर्च हो सकते हैं. 

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वहीं कार इंश्योरेंस का खर्च भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. औसतन 15,000 से 25,000 रुपये सालाना इंश्योरेंस पर खर्च होते हैं. इस हिसाब से पांच साल में इंश्योरेंस पर 75,000 रुपये से 1.25 लाख रुपये तक खर्च हो सकते हैं. इन तीन को मिलाकर कुल खर्च लाखों रुपये तक पहुंच जाता है.

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टायर, बैटरी और कीमत में गिरावट बदल देती है पूरा हिसाब

कार के मालिकाना खर्च में टायर और बैटरी भी अहम भूमिका निभाते हैं. सामान्य उपयोग के दौरान पांच साल में एक बार टायर बदलने की जरूरत पड़ सकती है, जिस पर 20,000 से 40,000 रुपये तक खर्च हो सकते हैं. वहीं नई बैटरी लगवाने पर 5,000 से 10,000 रुपये तक खर्च आ सकता है. इसके अलावा कार की कीमत समय के साथ कम होती रहती है. उदाहरण के लिए 8 लाख रुपये में खरीदी गई कार की रीसेल वैल्यू पांच साल बाद काफी कम हो सकती है. 

अगर सभी खर्चों को जोड़ दिया जाए, तो 8 लाख रुपये की कार पर पांच साल में कुल खर्च करीब 12 लाख से 14 लाख रुपये तक पहुंच सकता है. यानी कार की मूल कीमत के अलावा 4 से 6 लाख रुपये अतिरिक्त खर्च करना पड़ सकता है. यही कारण है कि वाहन खरीदते समय केवल कीमत नहीं, बल्कि कुल ओनरशिप कॉस्ट को भी ध्यान में रखना बेहद जरूरी है.

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