पहाड़ी या ढलान वाली सड़कों पर गाड़ी चलाना सामान्य रोड की तुलना में थोड़ा मुश्किल होता है, क्योंकि यहां गाड़ी पर ज्यादा दबाव पड़ता है. जब गाड़ी ऊपर चढ़ती है तो इंजन को ज्यादा ताकत लगानी पड़ती है. अगर आप गलत गियर में गाड़ी चलाते हैं या बहुत ज्यादा रेस देते हैं तो इंजन पर लोड बढ़ जाता है और वह जल्दी गर्म होने लगता है. इसी को इंजन ओवरहीटिंग कहते हैं. लंबे समय तक ऐसा करने से गाड़ी बीच रास्ते में बंद भी हो सकती है.
इन गलतियों को न करें नजरअंदाज
इसी तरह ढलान पर बार-बार क्लच दबाकर या हाफ क्लच में गाड़ी चलाने से क्लच पर बहुत ज्यादा घर्षण बनता है. इसका मतलब है कि क्लच लगातार फिसलता रहता है और गर्म होता जाता है. धीरे-धीरे यह क्लच को जला देता है, जिससे गाड़ी सही से पिकअप नहीं लेती और मरम्मत का खर्च बहुत ज्यादा आ सकता है.
लोग अक्सर ढलान पर गाड़ी रोकने या आगे बढ़ाने के लिए सिर्फ क्लच और एक्सीलेरेटर पर भरोसा करते हैं, लेकिन यह तरीका गलत है। सही तरीका यह है कि हमेशा सही गियर का इस्तेमाल किया जाए और जरूरत पड़ने पर हैंड ब्रेक का सहारा लिया जाए। इससे गाड़ी कंट्रोल में रहती है और क्लच भी सुरक्षित रहता है.
इन टिप्स को फॉलो करना जरूरी
ढलान पर उतरते समय भी बहुत लोग सिर्फ ब्रेक पर दबाव डालते रहते हैं, जिससे ब्रेक गर्म होकर कमजोर हो सकते हैं. इसलिए सलाह दी जाती है कि नीचे उतरते समय गियर को कम रखा जाए ताकि इंजन खुद गाड़ी की स्पीड को कंट्रोल करे। इसे इंजन ब्रेकिंग कहा जाता है, जो गाड़ी को सुरक्षित तरीके से धीमा रखने में मदद करता है.
इसके अलावा, अगर गाड़ी में ज्यादा लोग बैठे हों या ज्यादा सामान लदा हो, तो इंजन और ज्यादा मेहनत करता है। अगर उसी समय आप लगातार क्लच और ब्रेक पर दबाव डालते हैं, तो इंजन और ट्रांसमिशन दोनों पर गर्मी बढ़ जाती है और खराबी का खतरा बढ़ जाता है.
सीधी बात यह है कि हिल ड्राइविंग में सबसे जरूरी चीज सही गियर, सही स्पीड और धैर्य है. अगर आप बार-बार क्लच पर दबाव डालेंगे या गलत गियर में गाड़ी चलाएंगे तो इंजन और क्लच दोनों जल्दी खराब हो सकते हैं लेकिन अगर आप सही तरीके से ड्राइविंग करते हैं, तो गाड़ी सुरक्षित भी रहती है और लंबे समय तक बिना परेशानी चलती है.
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