पेट्रोल और डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों ने आम लोगों का बजट बिगाड़ दिया है. ऐसे में इलेक्ट्रिक व्हीकल यानी EV तेजी से लोगों की पसंद बन रहे हैं. सरकार भी लगातार इलेक्ट्रिक गाड़ियों को बढ़ावा दे रही है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी हाल ही में लोगों से EV अपनाने की अपील की है ताकि प्रदूषण कम हो और फ्यूल पर होने वाला खर्च घटाया जा सके. हालांकि नई इलेक्ट्रिक कार खरीदना हर किसी के लिए आसान नहीं होता क्योंकि इनकी शुरुआती कीमत काफी ज्यादा होती है. लेकिन अगर कोई शख्स सेकंड हैंड या पुरानी इलेक्ट्रिक कार खरीदता है तो वह कम बजट में आधुनिक तकनीक वाली गाड़ी का फायदा उठा सकता है.

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सेकंड हैंड इलेक्ट्रिक कार खरीदना कई मामलों में नई पेट्रोल कार खरीदने से ज्यादा फायदेमंद साबित हो सकता है. इसकी सबसे बड़ी वजह EV की तेजी से घटती रीसेल वैल्यू है. नई इलेक्ट्रिक कारें शुरुआती कुछ सालों में काफी तेजी से सस्ती हो जाती हैं. इससे पहली बार खरीदने वाले को नुकसान होता है लेकिन वही कार सेकंड हैंड मार्केट में काफी कम कीमत पर उपलब्ध हो जाती है. यानी कम पैसे में बेहतर फीचर्स और नई तकनीक वाली कार खरीदी जा सकती है.

सेकेंड हैंड EV बचाएगी लाखों रुपये

अगर कोई शख्स लगभग 3 साल पुरानी इलेक्ट्रिक SUV खरीदता है तो वह नई पेट्रोल SUV के मुकाबले लाखों रुपये तक बचा सकता है. जबकि पुरानी पेट्रोल कार खरीदने पर इतनी ज्यादा बचत नहीं होती. इसका कारण यह है कि इलेक्ट्रिक कारों में इंजन, गियरबॉक्स और कई जटिल पार्ट्स नहीं होते, जिससे उनकी मेंटेनेंस लागत कम रहती है. पेट्रोल और डीजल कारों में समय-समय पर इंजन ऑयल बदलना, सर्विसिंग और दूसरे पार्ट्स पर ज्यादा खर्च आता है, जबकि EV में ऐसे खर्च काफी कम हो जाते हैं.

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इलेक्ट्रिक कार के बड़े फायदे

इलेक्ट्रिक कार का सबसे बड़ा फायदा उसका कम रनिंग कॉस्ट माना जाता है. अगर कोई शख्स अपनी EV को घर पर चार्ज करता है तो प्रति किलोमीटर खर्च पेट्रोल कार की तुलना में बहुत कम आता है. घरेलू बिजली से चार्जिंग सस्ती पड़ती है और इससे हर महीने फ्यूल पर होने वाला खर्च काफी कम हो सकता है. हालांकि अगर बार-बार पब्लिक फास्ट चार्जिंग स्टेशन का इस्तेमाल किया जाए तो खर्च थोड़ा बढ़ सकता है. फिर भी कुल मिलाकर इलेक्ट्रिक कार चलाना पेट्रोल या डीजल कार की तुलना में ज्यादा किफायती माना जाता है.

सेकंड हैंड EV खरीदते समय बैटरी की स्थिति पर ध्यान देना बेहद जरूरी होता है.क्योंकि इलेक्ट्रिक कार की बैटरी सबसे महंगा हिस्सा होती है. अगर बैटरी की हेल्थ अच्छी हो तो पुरानी EV कई सालों तक आराम से चल सकती है. आजकल कई कंपनियां बैटरी पर लंबी वारंटी भी देती हैं, जिससे खरीदारों का भरोसा बढ़ा है. यही कारण है कि अब सेकंड हैंड इलेक्ट्रिक कारों की मांग भी तेजी से बढ़ रही है.

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