लोग नई बाइक खरीदने के बाद इसे अपने हिसाब से मॉडिफाई करा लेते हैं. अगर आप भी अपनी बाइक को अलग दिखाने के लिए मॉडिफिकेशन कराते हैं तो आपको ट्रैफिक रूल्स के बारे में जानना भी बेहद जरूरी है. आपने बाइक का मोडिफिकेशन करा लिया और आपको बाद में पता चला कि आपका चालान कट गया है तो ये आपके लिए बड़ी समस्या बन सकता है. ऐसे में अगर आप बाइक को मॉडिफाई करवाने का मन बना रहे हैं तो आपको इन जरूरी पॉइंट्स के बारे में जानना जरूरी है.
क्या कहता है मोटर वाहन अधिनियम?
मोटर वाहन अधिनियम 1988 के मुताबिक, बाइक के मेन स्ट्रक्चर या इंजन स्पेसिफिकेशन्स में किसी भी तरह का मॉडिफिकेशन कराना लीगल नहीं है. आपके लिए जानना जरूरी है कि इसमें बाइक की बॉडी को पूरी तरह से बदल देना, सीट को मॉडिफाई करना ताकि वो अपने ऑरिजनल डिजाइन जैस न दिखे और चेसिस को काटना आदि शामिल होता है. अगर आप ऐसा करते हैं तो इसके लिए आपको भारी जुर्माना देना पड़ सकता है. इसमें 5 हजार रुपये से 10 हजार रुपये तक का जुर्माना शामिल है, बल्कि बाइक को भी जब्त किया जा सकता है.
मोटर वाहन नियम का माना जाता है उल्लंघन
अगर आप बाइक की लाइट्स और हॉर्न में भी मोडिफिकेशन करते हैं तो इसको लेकर भी सख्त नियम हैं. आप ज्यादा चमकने वाली और गैर मानक लाइट्स नहीं लगा सकते हैं. क्योंकि ये सामने से आने वाले ड्राइवर्स के लिए खतरा पैदा कर सकती हैं. इसी तरह स्टाइलिश नंबर प्लेट लगाना भी मोटर वाहन नियम का उल्लंघन माना जाता है.
RTO को देनी होगी सूचना
अक्सर आपने देखा होगा कि लोग साइलेंसर को बदलवा देते हैं. इसमें लोगों को लगता है कि तेज और गूंजने वाली आवाज से वो स्टाइल दिखा सकेंगे, लेकिन ऐसा करना दूसरे लोगों के लिए सिर्फ मुसीबत ही पैदा कर सकता है. किसी भी साइलेंसर का यूज करना सरकारी डेसिबल लिमिट से ज्यादा आवाज पैदा करना है, जो कि लीगल नहीं है. अगर आप अपनी गाड़ी में किसी भी तरह का मोडिफिकेशन करवाते हैं तो इसके लिए आपको इसकी सूचना रीजनल ट्रांसपोर्ट ऑफिस (RTO) को देनी होगी. अगर आप आरटीओ को सूचित नहीं करते हैं तो इससे आपके रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट में अपडेट नहीं किया जाएगा, जिससे आपके लिए मुसीबत खड़ी हो सकती है.
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