भारत की ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री ने वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) में एक नया रिकॉर्ड बना दिया है. इस दौरान कुल 2.82 करोड़ यानी करीब 28 मिलियन गाड़ियों की बिक्री हुई, जो पिछले साल के मुकाबले 10.4% ज्यादा है. SIAM (सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स) के अनुसार, यह पिछले 7 साल में सबसे ज्यादा बिक्री है. खास बात ये है कि इस ग्रोथ में हर सेगमेंट का योगदान रहा, चाहे वह पैसेंजर व्हीकल हो, टू-व्हीलर, थ्री-व्हीलर या कमर्शियल व्हीकल.

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सभी सेगमेंट में दिखी जबरदस्त बढ़ोतरी

FY26 में पैसेंजर वाहनों की बिक्री 7.9% बढ़कर 46.43 लाख यूनिट्स तक पहुंच गई. वहीं, टू-व्हीलर सेगमेंट में सबसे ज्यादा योगदान देखने को मिला, जहां बिक्री 10.7% बढ़कर 2.17 करोड़ यूनिट्स हो गई. थ्री-व्हीलर सेगमेंट में 12.8% की बढ़ोतरी के साथ 8.36 लाख यूनिट्स की बिक्री हुई. कमर्शियल व्हीकल्स भी पीछे नहीं रहे और 12.6% की बढ़त के साथ 10.79 लाख यूनिट्स बिके. कुल मिलाकर, हर कैटेगरी में मजबूत प्रदर्शन ने इंडस्ट्री को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया.

एक्सपोर्ट्स में भी शानदार प्रदर्शन

घरेलू बाजार के साथ-साथ एक्सपोर्ट्स में भी अच्छी बढ़त देखने को मिली. पैसेंजर वाहनों का एक्सपोर्ट 17.5% बढ़कर 9.05 लाख यूनिट्स हो गया. टू-व्हीलर एक्सपोर्ट में 23.4% की तेजी आई और यह 51.80 लाख यूनिट्स तक पहुंच गया. सबसे ज्यादा बढ़ोतरी थ्री-व्हीलर सेगमेंट में हुई, जहां एक्सपोर्ट 50.1% बढ़कर 4.60 लाख यूनिट्स हो गया. जिससे साफ पता चलता है कि भारतीय ऑटो इंडस्ट्री अब ग्लोबल मार्केट में भी मजबूत पकड़ बना रही है.

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मार्च 2026 और Q4 में भी रही तेजी

मार्च 2026 में भी बिक्री का सिलसिला जारी रहा. इस महीने पैसेंजर वाहनों की बिक्री 16% बढ़कर 4.42 लाख यूनिट्स हो गई. टू-व्हीलर बिक्री 19.3% बढ़कर 19.76 लाख यूनिट्स और थ्री-व्हीलर बिक्री 21.4% बढ़कर 76,273 यूनिट्स हो गई. जनवरी से मार्च 2026 की तिमाही (Q4) में भी सभी सेगमेंट में दोहरे अंक की बढ़ोतरी देखी गई. इससे साफ है कि साल के अंत में मांग और भी मजबूत रही.

आगे का आउटलुक कैसा रहेगा?

SIAM के अनुसार, 2026-27 में भी ऑटो इंडस्ट्री की ग्रोथ जारी रहने की उम्मीद है. घरेलू मांग और बेहतर आर्थिक माहौल इस ग्रोथ को आगे बढ़ाएंगे. हालांकि, कुछ जोखिम भी बने हुए हैं जैसे कच्चे तेल की कीमत, सप्लाई चेन की समस्या और वैश्विक हालात. इनका असर इंडस्ट्री पर पड़ सकता है.

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