Grah Gochar 2026: देश के अलग-अलग हिस्सों से हाल के दिनों में आगजनी, शॉर्ट सर्किट, फैक्ट्री ब्लास्ट और हल्के भूकंप के झटकों (Earthquake Tremors) की खबरें लगातार सामने आ रही हैं. आम तौर पर लोग इसे केवल भीषण गर्मी या टेक्टोनिक प्लेटों की हलचल से जोड़कर देखते हैं. लेकिन वैदिक ज्योतिष (Vedic Astrology) के जानकारों की मानें तो इन प्राकृतिक और मानव-निर्मित आपदाओं के पीछे ब्रह्मांड में चल रही ग्रहों की एक बहुत बड़ी और उग्र हलचल जिम्मेदार है.
इस समय आकाशमंडल में अग्नि तत्व (Fire Element) के दो सबसे शक्तिशाली ग्रहों, सूर्य और मंगल की स्थिति कुछ ऐसी बनी हुई है, जो अप्रत्याशित रूप से आग, उग्रता और भूगर्भीय अशांति (भूकंप) को बढ़ावा दे रही है. आइए समझते हैं कि जून 2026 का यह ग्रह गोचर कैसे देश-दुनिया पर असर डाल रहा है.
1. मंगल का कृत्तिका नक्षत्र में जाना: 'आग' को मिली और हवा
ज्योतिष शास्त्र में मंगल (Mars) को ऊर्जा, साहस, भूमिपुत्र और अग्नि का मुख्य कारक माना जाता है. इस महीने मंगल देव ने सूर्य के स्वामित्व वाले कृत्तिका नक्षत्र में प्रवेश किया है. कृत्तिका नक्षत्र का प्रतीक चिन्ह 'तेज धार वाला ब्लेड या पवित्र अग्नि' है. जब अग्नि तत्व के ग्रह मंगल का मिलन सूर्य के इस तीक्ष्ण नक्षत्र से होता है, तो ऊर्जा का स्तर अचानक अनइक्वल और अनियंत्रित हो जाता है. यही वजह है कि अचानक आगजनी, गैस सिलेंडर ब्लास्ट और फैक्ट्रियों में ओवरहीटिंग के हादसे तेजी से बढ़े हैं.
2. वृषभ राशि में मंगल: यही स्थिति बनती है भूकंप का कारण
हाल ही में मंगल ने शुक्र की राशि वृषभ (Taurus) में प्रवेश किया है. ज्योतिष में वृषभ को एक पृथ्वी तत्व (Earth Sign) की राशि माना जाता है. ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, जब मंगल जैसा धधकता हुआ उग्र ग्रह किसी पृथ्वी तत्व की राशि में जाता है, तो वह जमीन के अंदर की उथल-पुथल को बढ़ा देता है.
मंगल को 'भूमिपुत्र' भी कहा जाता है, इसलिए पृथ्वी राशि में इसकी उग्रता के कारण जमीन के अंदर टेक्टोनिक प्लेट्स में अचानक दबाव बढ़ता है. इसी वजह से कई बार अचानक भूकंप आने की संभावना या पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन (Landslides) जैसी स्थितियां बन जाती हैं. इसके साथ ही, सूर्य भी इस समय बुध की राशि मिथुन में गोचर कर रहे हैं, जिससे वातावरण में उमस और अचानक मौसम बदलने की घटनाएं भी देखने को मिल रही हैं.
अग्नि तत्व की 3 राशियां रहें विशेष सावधान
अग्नि तत्व की राशियां:-- मेष (Aries), सिंह (Leo), और धनु (Sagittarius) इस गोचर से सीधे प्रभावित हो रही हैं, इसलिए इन जातकों को व्यक्तिगत जीवन में भी कुछ सावधानियां बरतनी चाहिए:
क्रोध पर नियंत्रण: इस दौरान इन तीनों राशियों के जातकों में चिड़चिड़ापन या अचानक गुस्सा आ सकता है. वाणी पर संयम रखें.
वाहन और रसोई में सतर्कता: गाड़ी चलाते समय जल्दबाजी न करें. घर की रसोई, गैस सिलेंडर या बिजली के भारी उपकरणों का इस्तेमाल करते समय अतिरिक्त सावधानी बरतें.
इन आपदाओं और उग्रता से बचाव के ज्योतिषीय उपाय
यदि आपकी कुंडली में मंगल की स्थिति ठीक नहीं है या आप इस गोचर के नकारात्मक प्रभाव से बचना चाहते हैं, तो ये सरल उपाय जरूर करें:
- हनुमान चालीसा का पाठ: नियमित रूप से हनुमान चालीसा या बजरंग बाण का पाठ करें. हनुमान जी मंगल के नियंत्रक देव हैं और हर संकट को हरते हैं.
- भूमि को नमन: सुबह सोकर उठते ही सबसे पहले अपने पैर जमीन पर रखने से पहले धरती माता को प्रणाम करें. इससे भूमिपुत्र मंगल शांत होते हैं.
- तांबे के लोटे से सूर्य को अर्घ्य: रोज सुबह सूर्य नारायण को जल अर्पित करें. इससे सूर्य-मंगल की नकारात्मक उग्रता शांत होती है.
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