Shani Dev: ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों की चाल कभी भी स्थिर नहीं रहती, और जब बात शनि देव की हो, तो पूरी दुनिया की नजरें उनकी स्थिति पर टिकी होती हैं. वर्ष 2026 एक ऐसा वर्ष है जहां शनि देव का प्रभाव अपनी पूरी तीव्रता के साथ दिखाई देगा. शनि इस दौरान मीन राशि (Pisces) में गोचर करेंगे, जो कि देवगुरु बृहस्पति की राशि है.
शनि का जल तत्व की राशि में संचरण न केवल व्यक्तिगत जीवन बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और सामाजिक ढांचे पर भी गहरा असर डालने वाला है. आइए जानते हैं कि 2026 में शनि किन राशियों की परीक्षा लेंगे और इसके पीछे के वास्तविक ज्योतिषीय कारण क्या हैं.
शनि की 'साढ़ेसाती' और 'ढैय्या' का गणित
शनि देव एक राशि में लगभग 30 महीने (ढाई साल) रहते हैं. जब शनि जन्म राशि से एक भाव पहले, उसी राशि पर, और एक भाव आगे बढ़ते हैं, तो उसे साढ़ेसाती कहा जाता है. वहीं, जब शनि जन्म राशि से चौथे या आठवें भाव में होते हैं, तो उसे ढैय्या कहते हैं.
2026 में इन राशियों पर रहेगा विशेष प्रभाव
मीन राशि (Pisces) - स्वयं की परीक्षामीन राशि के जातकों के लिए शनि उनकी अपनी ही राशि में गोचर करेंगे. यह साढ़ेसाती का दूसरा और सबसे महत्वपूर्ण चरण है.
- चुनौतियां: मानसिक अशांति और भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है. लिए गए निर्णयों में देरी हो सकती है.
- सावधानी: अपनी सेहत, विशेषकर पैरों और नसों से जुड़ी समस्याओं को नजरअंदाज न करें.
मेष राशि (Aries) - नई जिम्मेदारियों का बोझमेष राशि वालों के लिए शनि बारहवें भाव में रहेंगे, जिससे साढ़ेसाती का प्रथम चरण शुरू होगा.
- चुनौतियां: अचानक खर्चों में बढ़ोतरी हो सकती है. बाहरी संपर्कों या विदेश से जुड़े कार्यों में बाधा आ सकती है.
- सावधानी: निवेश करते समय दस्तावेजों की अच्छी तरह जांच करें.
कुंभ राशि (Aquarius) - राहत की ओर बढ़ता कदमकुंभ राशि के लिए यह साढ़ेसाती का अंतिम चरण होगा.
- चुनौतियां: पिछले साढ़े सात वर्षों का संचित तनाव कम होगा, लेकिन आर्थिक स्थिरता पाने के लिए अभी भी संघर्ष करना पड़ सकता है.
- सकारात्मक पक्ष: पुराने विवाद सुलझने शुरू होंगे और करियर में स्थिरता आएगी.
सिंह राशि (Leo) - अष्टम ढैय्या का प्रभावसिंह राशि के लिए शनि आठवें भाव में रहेंगे. इसे 'अष्टम शनि' कहा जाता है, जो काफी संवेदनशील माना जाता है.
- चुनौतियां: कार्यस्थल पर षड्यंत्र या गुप्त शत्रुओं से सावधान रहें. पैतृक संपत्ति को लेकर विवाद हो सकता है.
धनु राशि (Sagittarius) - चतुर्थ ढैय्या का असरधनु राशि के जातकों के लिए शनि चौथे भाव में होंगे, जिसे 'कंटक शनि' भी कहा जाता है.
- चुनौतियां: पारिवारिक सुख में कमी और माता के स्वास्थ्य को लेकर चिंता बनी रह सकती है. घर के वातावरण में तनाव महसूस हो सकता है.
शनि देव क्यों देते हैं संघर्ष?
अक्सर लोग शनि को 'क्रूर' मानते हैं, लेकिन ज्योतिषीय दृष्टि से शनि एक कठोर शिक्षक हैं. वे 2026 में विशेष रूप से उन लोगों को कष्ट देंगे जो-
- अपने कर्तव्यों के प्रति ईमानदार नहीं हैं.
- दूसरों का हक मारते हैं या अनैतिक कार्यों में लिप्त हैं.
- मेहनत के बजाय शॉर्टकट की तलाश करते हैं.
शनि उपाय (Remedies for 2026)
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, शनि केवल पूजा-पाठ से नहीं, बल्कि कर्मों से भी शांत होते हैं, इसके लिए ये उपाय करने चाहिए-
- छाया दान: शनिवार की सुबह लोहे के पात्र में सरसों का तेल भरकर अपना चेहरा देखें और उसे दान करें.
- श्रमिकों का सम्मान: शनि देव समाज के निचले तबके और श्रमिकों के प्रतिनिधि हैं. उन्हें भोजन या काला कंबल दान करने से शनि दोष कम होता है.
- पीपल की सेवा: प्रत्येक शनिवार पीपल के वृक्ष के नीचे चौमुखा दीपक जलाएं.
- आचरण में सुधार: झूठ बोलने और मांसाहार-मदिरापान से बचने पर शनि का प्रकोप स्वत: कम हो जाता है.
डरे नहीं, सावधान रहें
वर्ष 2026 का शनि गोचर मीन, मेष, कुंभ, सिंह और धनु राशि के लिए केवल कष्टों का समय नहीं है, बल्कि यह कायाकल्प का समय है. शनि आपको मजबूत बनाने के लिए संघर्ष देते हैं. यदि आप धैर्य और ईमानदारी से अपना काम करते रहेंगे, तो यही शनि आपको समाज में सर्वोच्च स्थान दिला सकते हैं.
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