West Bengal New CM Race: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजे अब अपने आखिरी पड़ाव पर हैं. बीजेपी रुझानों में बहुमत के करीब दिख रही है, लेकिन सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि मुख्यमंत्री की कुर्सी पर कौन बैठेगा.

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आज 4 मई 2026 की दोपहर 4:12 बजे से 'भद्रा' लग चुकी है. ज्योतिष के ग्रंथों की मानें तो भद्रा का समय बड़े फैसलों के लिए बहुत संवेदनशील होता है, इसलिए सीएम के नाम का ऐलान होने में थोड़ा वक्त लग सकता है.

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4 मई की शाम की प्रश्न कुंडली के अनुसार, इस समय ग्रहों की स्थिति कुछ ऐसे इशारे कर रही है जो बंगाल की राजनीति में बड़े बदलाव का संकेत हैं.

भद्रा का असर और फैसलों में देरी

आज पंचांग में 'विष्टि करण' यानी भद्रा का प्रभाव है. सरल शब्दों में कहें तो भद्रा के समय में राजनैतिक दल बड़े ऐलान करने से बचते हैं. इसका मतलब यह नहीं है कि नतीजे बदलेंगे, बल्कि इसका अर्थ यह है कि जीत के बाद भी मुख्यमंत्री के नाम पर मुहर लगने में कुछ घंटों या एक-दो दिन की देरी हो सकती है. बीजेपी नेतृत्व इस समय बहुत फूंक-फूंक कर कदम रखेगा ताकि भविष्य में सरकार चलाने में कोई दिक्कत न आए.

गुप्त रणनीति से तय होगा नाम

आज की कुंडली में लग्नेश बुध 8वें घर में बैठा है. ज्योतिष में 8वां घर छिपी हुई चीजों और रहस्यों का होता है. इसका साफ मतलब है कि बंगाल का नया मुख्यमंत्री कौन होगा, इसका फैसला भीड़ या रैलियों के शोर से नहीं, बल्कि दिल्ली के बंद कमरों में होने वाली गुप्त बैठकों से होगा. यह फैसला पूरी तरह से संगठन और तालमेल पर आधारित होगा न कि केवल व्यक्तिगत लोकप्रियता पर.

कौन से नाम हैं चर्चा में?

बंगाल की सियासत में इस समय कुछ चेहरों की सबसे ज्यादा चर्चा है. सुवेंदु अधिकारी अपनी आक्रामकता और जमीनी पकड़ के कारण रेस में सबसे आगे माने जा रहे हैं. वहीं दिलीप घोष जैसे पुराने और अनुशासित नेताओं का दावा भी मजबूत है. लेकिन, चूंकि कुंडली में 'गुप्त रणनीति' का योग है, इसलिए इस बात की भी पूरी संभावना है कि दिल्ली से कोई ऐसा 'सरप्राइज' नाम सामने आए जिसकी चर्चा फिलहाल मीडिया में नहीं हो रही है.

कैसा होगा नया मुख्यमंत्री?

कुंडली के सितारों के अनुसार, बंगाल का नया मुख्यमंत्री स्वभाव से बहुत अनुशासित और कड़े फैसले लेने वाला होगा. मूलांक 1 और ज्येष्ठा नक्षत्र का प्रभाव बताता है कि नया नेतृत्व पुरानी व्यवस्था को पूरी तरह बदलने की कोशिश करेगा. यह व्यक्ति केंद्र और राज्य के बीच एक मजबूत कड़ी साबित होगा. हालांकि, वृश्चिक का चंद्रमा यह भी कहता है कि नई सरकार को शुरुआत में काफी राजनैतिक संघर्ष और विरोध का सामना करना पड़ सकता है.

नाम नहीं, प्रक्रिया को समझें

अंत में, ग्रहों की चाल हमें किसी एक नाम तक नहीं ले जाती, बल्कि एक पैटर्न दिखाती है. भद्रा और अष्टम बुध के कारण नाम तय होने में थोड़ा समय लग सकता है. मुख्यमंत्री वही बनेगा जिस पर पार्टी के बड़े नेताओं और संगठन की आपसी सहमति होगी. यह जीत किसी एक चेहरे की नहीं बल्कि एक सोची-समझी रणनीति की होगी. अब बस कुछ घंटों का इंतजार है जब बंगाल के नए 'बॉस' के नाम से पर्दा उठेगा.

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