Jaisalmer Cow Death Case: राजस्थान के जैसलमेर से सामने आई एक दर्दनाक घटना ने एक बार फिर गौ संरक्षण, पशु प्रबंधन और प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. शहर से करीब 7 किलोमीटर दूर रामगढ़ रोड स्थित नगर परिषद के डंपिंग यार्ड में 300 से ज्यादा मृत गायों के शव मिलने के बाद इलाके में भारी आक्रोश फैल गया. सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में बड़ी संख्या में सड़ते हुए पशु शव खुले में पड़े दिखाई दिए. इसके बाद प्रशासन हरकत में आया और जांच शुरू की. इस घटना के बाद नगर परिषद ने संबंधित ठेकेदार को नोटिस जारी किया, जबकि जिला प्रशासन ने पूरे मामले की तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी.  लेकिन क्या आप जानते हैं कि क्यों आखिर इतनी बड़ी पशु आपदाएं आती हैं? इनके पीछे की वजह क्या है. आइए आपको इससे रूबरू कराते हैं.

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आखिर क्यों होती है इतनी बड़ी संख्या में गायों की मौत? 

एक्सपर्ट्स और पशुपालन विभाग से जुड़े अधिकारियों के अनुसार एक साथ बड़ी संख्या में गायों की मौत के पीछे कई वजह हो सकती है. राजस्थान जैसे गर्म इलाकों में गर्मी, पानी की कमी और चारे का संकट अक्सर पशुओं की हालत खराब कर देता है. कई बार बीमार, बेसहारा और कमजोर पशु समय पर इलाज नहीं मिलने के कारण दम तोड़ देते हैं. इसके अलावा लम्पी स्किन डिजीज जैसी संक्रामक बीमारियों भी पिछले कुछ वर्षों में बड़ी संख्या में पशुओं की मौत का कारण बनी. ग्रामीण और शहरी इलाकों में घूमने वाली आवारा गायें प्लास्टिक और कचरा खाने को मजबूर होती है, जिससे उनके पेट में गंभीर संक्रमण और बीमारियां हो जाती है. कई पशु सड़क हादसों, भूख और लंबे समय तक देखभाल न मिलने के कारण भी मर जाते हैं. 

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निस्तारण पर उठे सवाल 

इस पूरे मामले ने मृत पशुओं के निस्तारण की व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं. नगर परिषद की ओर से ठेकेदारों को डंपिंग यार्ड में एक तय स्थान और गड्ढा उपलब्ध कराया गया था. लेकिन आरोप है कि नियमों का पालन नहीं किया गया. खुले में शव पड़े रहने से बदबू, संक्रमण और पर्यावरण प्रदूषण का खतरा भी बढ़ गया. स्थानीय लोगों और गौ सेवकों का कहना है कि अगर समय रहते शवों का सही तरीके से निस्तारण किया जाता तो इतनी भयावह तस्वीर सामने नहीं आती. घटना के बाद लोगों ने प्रशासन से मांग की कि सिर्फ कार्रवाई की घोषणा के बजाय जमीन पर पशुओं की सुरक्षा, गौशाला की व्यवस्था और इलाज की सुविधाओं को मजबूत किया जाए. 

शुरूआती जांच में क्या आया सामने

शुरुआती जांच में सामने आया की मृत पशुओं के निस्तारण की जिम्मेदारी जिस अधिकृत ठेकेदार को दी गई थी, उसने तय नियमों के अनुसार शवों को दफनाने या वैज्ञानिक तरीके से निपटारा करने के बजाय उन्हें खुले में छोड़ दिया. इसी लापरवाही के कारण डंपिंग यार्ड में बड़ी संख्या में शव जमा होते गए. नगर परिषद आयुक्त के अनुसार कई दिनों से मृत पशुओं को डंपिंग यार्ड तक तो लाया जा रहा था, लेकिन उनका सही तरीके से निस्तारण नहीं किया गया. मामला सामने आने के बाद प्रशासन ने तुरंत सफाई अभियान शुरू कराया और जेसीबी मशीनों की मदद से शवों को हटाकर गड्ढे में दफनाने की प्रक्रिया शुरू की गई. साथ ही ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी भी शुरू कर दी गई है. प्रशासन ने कहा साफ कहा है की संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर अनुबंध रद्द करने के साथ सुरक्षा राशि भी जब्त की जा सकती है. 

जांच जारी रिपोर्ट का इंतजार 

जैसलमेर में हुई इस घटना के बाद फिलहाल जिला प्रशासन ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है. जांच में यह देखा गया है कि मृत पशुओं को खुले में क्यों छोड़ा गया, कितने दिनों से शव जमा हो रहे थे और तय नियमों का पालन क्यों नहीं हुआ. रिपोर्ट आने के बाद ठेकेदार पर कानूनी कार्रवाई, अनुबंध रद्द करने और अन्य प्रशासनिक कदम उठाए जा सकते हैं.

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