Wheat Consumption India: सुबह के नाश्ते में ब्रेड और पराठे से लकेर दोपहर और रात के खाने में रोटी तक, गेहूं लगभग हर भारतीय घर की जरूरत बन चुका है. खासकर उत्तर भारत में तो इसके बिना खाने की थाली ही अधूरी मानी जाती है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि, देशभर में लोग एक साल में कितना गेहूं इस्तेमाल कर जाते हैं? यह आंकड़ा करोड़ों टन में पहुंचता है. गेहूं सिर्फ लोगों का पेट ही नहीं भरता, बल्कि इसकी खेती, खरीद-बिक्री और आटे के कारोबार से लाखों लोगों की रोजी-रोटी भी जुड़ी है.
अमेरिकी कृषि विभाग (USDA) की रिपोर्ट के मुताबिक, अप्रैल 2026 से मार्च 2027 के बीच भारत में करीब 11.50 करोड़ टन गेहूं की कुल खपत होने का अनुमान है. इसमें घरों में खाने के अलावा आटा, ब्रेड, बिस्कुट और दूसरी चीजें बनाने में इस्तेमाल होने वाला गेहूं भी शामिल है. हालांकि, यह पूरे साल का अनुमान है, अक्टूबर तक खाए जा चुके गेहूं का आंकड़ा नहीं.
खाने के लिए कितना गेहूं इस्तेमाल होगा?
रिपोर्ट के मुताबिक, इस दौरान खाने और खाद्य उत्पाद बनाने के साथ औद्योगिक इस्तेमाल के लिए लगभग 10.75 करोड़ टन गेहूं की जरूरत पड़ सकती है. वहीं, पशुओं के चारे और दूसरे इस्तेमाल में करीब 75 लाख टन गेहूं जा सकता है. यानी देश में गेहूं की खपत सिर्फ रोटी बनाने तक सीमित नहीं है.
कितने रुपये का हुआ गेहूं का कारोबार?
अब सवाल है कि इतने गेहूं की कीमत कितनी होगी? सरकार ने 2026-27 के लिए गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2,585 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है. अगर 11.50 करोड़ टन गेहूं की अनुमानित कुल खपत का हिसाब इसी भाव से लगाएं, तो इसकी कीमत करीब 2.97 लाख करोड़ रुपये बैठती है. हालांकि, यह केवल समझाने के लिए किया गया हिसाब है. इसे देश में गेहूं की असल बिक्री या कारोबार का सरकारी आंकड़ा नहीं माना जा सकता. बाजार में गेहूं के भाव अलग-अलग होते हैं.
यह भी पढ़ें: इस मॉनसून कमजोर पड़ा गेहूं, 59% घटकर 11,000 हेक्टेयर रह गई बुवाई
कितना गेहूं पैदा हुआ?
भारत गेहूं उगाने वाले बड़े देशों में शामिल है. USDA की रिपोर्ट में 2026-27 के लिए भारत का गेहूं उत्पादन करीब 12 करोड़ टन रहने का अनुमान लगाया गया है. उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में बड़े पैमाने पर इसकी खेती होती है. इन राज्यों के किसानों की पैदावार देश की जरूरत पूरी करने में अहम भूमिका निभाती है.
किसानों के लिए क्या मायने हैं ये आंकड़े?
गेहूं की इतनी बड़ी खपत बताती है कि देश में इसकी मांग लगातार बनी रहती है. हालांकि, किसानों की कमाई सिर्फ मांग पर निर्भर नहीं करती. अच्छी पैदावार के साथ सही बाजार भाव मिलना भी जरूरी है. किसानों को गेहूं बेचने से पहले मंडी का भाव, सरकारी खरीद की व्यवस्था और भंडारण का खर्च जरूर देखना चाहिए. इससे वे अपनी फसल बेचने का बेहतर फैसला ले सकते हैं.
यह भी पढ़ें: देशभर में कितने कोल्ड स्टोरेज, कहां भरा है सबसे बड़ा खाद्य भंडार?
