भारतीय घरों में तुलसी का पौधा सिर्फ एक सामान्य पौधा नहीं बल्कि इसका काफी धार्मिक महत्व भी है. बहुत से लोगों का मानना होता है कि इसे लगाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है. इतना ही नहीं आयुर्वेद के लिहाज से भी इसके कई फायदे हैं. इसलिए भारत में लगभग हर दूसरे-तीसरे घर के आंगन या बालकनी में हरी-भरी तुलसी का पौधा नजर आ जाता है. अक्सर बदलते मौसम में सही पोषण न मिलने से तुलसी का पौधा अचानक सूखने लगता है.
हरी पत्तियां पीली पड़कर गिरने लगती हैं और पौधा एकदम बेजान दिखने लगता है. कई लोग रोज लोटा भरकर पानी देते हैं. फिर भी समझ नहीं पाते कि पौधा क्यों मुरझा रहा है. अगर आपके घर की तुलसी भी सूख रही है तो परेशान होने की जरूरत नहीं है. कुछ आसान घरेलू उपाय और देखभाल के इन तरीकों से आप मुरझाते पौधे में दोबारा जान डाल सकते हैं. चलिए जानते हैं कि कौन सी खास चीजें डालने से तुलसी का पौधा सालों-साल हरा-भरा बना रहेगा.
तुलसी के लिए असरदार है कच्चा दूध और हल्दी
तुलसी को घना और हरा-भरा रखने के लिए किसी महंगे केमिकल खाद की जरूरत नहीं है. बल्कि आप रसोई रखी कुछ चीजों का ही इस्तेमाल कर सकते हैं. हफ्ते में एक बार आधा कप कच्चे दूध में थोड़ा सा साफ पानी मिलाकर तुलसी की जड़ों में डालें. कच्चे दूध से पौधे को जरूरी कैल्शियम, प्रोटीन और पोषक तत्व मिलते हैं. जिससे पत्तियां हरी और चमकदार बनती हैं.
इसके साथ ही हल्दी पाउडर तुलसी के लिए एक बढ़िया सुरक्षा कवच है. अगर गमले की मिट्टी में फंगस, दीमक और सफेद कीड़े लग रहे हों. तो एक छोटा चम्मच हल्दी पाउडर मिट्टी की हल्की गुड़ाई करके जड़ों के पास मिला दें. आप हल्दी के पानी का स्प्रे पत्तियों पर भी कर सकते हैं. हल्दी एक नैचुरल एंटीफंगल एजेंट है. जो जड़ों को सड़ने से बचाती है और पौधे की इम्यूनिटी को तेजी से बढ़ाती है.
मंजरी हटाने और छंटाई करने का सही तरीका
तुलसी के पौधे के सूखने की सबसे बड़ी और आम वजह होती है उस पर आने वाली मंजरी यानी उसके बीज. जब पौधे पर मंजरी आने लगती है और पक जाती है. तो पौधा मान लेता है कि उसकी लाइफ साइकिल पूरी हो गई है. और वह नई पत्तियां निकालना बंद कर अपनी पूरी ताकत बीज बनाने में लगा देता है. जिससे धीरे-धीरे पूरा पौधा सूख जाता है.
इसलिए जैसे ही पौधे पर मंजरी दिखे उसे ऊपर से तुरंत उंगलियों से पिंच करके हटा दें. नियमित रूप से मंजरी हटाने और सूखी टहनियों की हल्की प्रूनिंग करने से पौधे की ग्रोथ नीचे से नई शाखाओं के रूप में तेजी से होती है. पौधा सिर्फ लंबा होने के बजाय चारों तरफ फैलकर बहुत घना बन जाता है. समय-समय पर खराब पत्तों को हटाते रहने से पौधे में धूप और हवा आसानी से पहुंचती है.
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इन तरीकों से करते रहें देखरेख
तुलसी के स्वास्थ्य के लिए पानी देने का सही तरीका और पर्याप्त धूप मिलना बेहद जरूरी है. रोज-रोज ज्यादा पानी डालने से गमले में पानी भर जाता है और जड़ें गलने लगती हैं. इसलिए तुलसी में पानी तभी दें जब गमले की ऊपरी 1 इंच मिट्टी सूखी महसूस हो. गमले के नीचे ड्रेनेज होल खुला रखें जिससे फालतू पानी आसानी से बाहर निकल जाए. तुलसी को दिनभर में कम से कम 4 से 5 घंटे की अच्छी और सीधी धूप मिलनी चाहिए.
महीने में एक बार गमले की मिट्टी की हल्की गुड़ाई जरूर करें जिससे जड़ों तक हवा और ऑक्सीजन पहुंच सके. गुड़ाई के बाद उसमें थोड़ी सी पुरानी सूखी गोबर की खाद डाल दें. नीम की खली का पाउडर भी मिट्टी में मिलाना काफी फायदेमंद माना जाता है. अगर आप इन बातों का ध्यान रखेंगे तो फिर आपके घर का तुलसी का पौधा कई साल तक हरा-भरा रहेगा.
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