देश में मॉनसून का मिजाज एक बार फिर तेजी से बदल रहा है और देश के कई हिस्सों में फिर से बारशि शुरू हो चुकी है. अगर आप भी खेती-किसानी से जुड़े हैं और खरीफ की फसलों की देखभाल में लगे हैं. तो फिर यह मौसम अपडेट आपके लिए बेहद काम का है. मौसम विभाग की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक अगले कुछ दिनों में कई राज्यों में मूसलाधार बारिश होने वाली है. मध्य भारत और पूर्वी हिस्सों में बने कम दबाव के क्षेत्र और चक्रवाती हवाओं के चलते मॉनसून की ट्रफ लाइन एक्टिव हो गई है.
ऐसे में कहीं यह बारिश धान की फसल के लिए काफी अच्ची साबित हो सकती है. तो कहीं निचले खेतों में पानी भरने से सोयाबीन, मक्का और सब्जियों को नुकसान का खतरा भी बढ़ रहा है. इसलिए समय रहते मौसम का हाल जान लेना और खेतों की तैयारी कर लेना किसानों के लिए बहुत जरूरी है. ताकि ऐन वक्त पर उन्हें कोई बड़ा नुकसान न झेलना पड़े.
किन-किन राज्यों में है भारी बारिश का अलर्ट?
मौसम विभाग के मुताबिक उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार, राजस्थान और महाराष्ट्र के कई जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है. खासकर पूर्वी उत्तर प्रदेश और बुंदेलखंड के इलाकों में तेज हवाओं के साथ जोरदार बूंदे पड़ने की पूरे चांस है. मध्य प्रदेश के चंबल, ग्वालियर और रीवा संभाग में ज्यादा प्रभावित इलाकों में है. जहां अगले दो से तीन दिन अच्छी बारिश देखने को मिल सकती है. इसके अलावा बिहार के सीमावर्ती जिलों और राजस्थान के कोटा, उदयपुर संभाग में भी बारिश का अलर्ट है.
उत्तराखंड और हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्यों में भारी बारिश से अचानक पानी बढ़ने और भूस्खलन का रिस्क बना हुआ है, जिसका असर मैदानी इलाकों की नदियों के जलस्तर पर पर पड़ेगा. पंजाब, हरियाणा और दिल्ली-एनसीआर में भी हल्की बारिश देखने को मिल सकती है. जिससे लोगों को उमस भरी गर्मी से राहत मिलेगी लेकिन तेज हवाएं खड़ी फसलों को प्रभावित कर सकती हैं. जिससे दिक्कत हो सकती है.
किन फसलों पर होगा इस बारिश का असर?
इस बारिश का सीधा असर खेतों में लहलहा रही खरीफ फसलों पर पड़ सकता हैय धान की खेती करने वाले किसानों के लिए यह समय काफी फायदेमंद माना जा रहा है. क्योंकि धान की बढ़वार और कल्ले फूटने के समय पानी की सबसे ज्यादा जरूरत होती है. जिन इलाकों में बारिश की कमी से ट्यूबवेल चलाने पड़ रहे थे. वहां किसानों का सिंचाई का भारी खर्च बच जाएगा. लेकिन लगातार पानी भरने से दलहन और तिलहन की फसलों पर मुश्किल आ सकती है.
सोयाबीन, मूंग, उड़द और अरहर जैसी फसलें ज्यादा पानी बिल्कुल सहन नहीं कर पातीं. अगर खेत में दो दिन भी पानी ठहरा रह गया. तो जड़ों के सड़ने और फंगस लगने का डर रहता है. इसके साथ ही कपास और मक्के के खेतों में तेज आंधी के साथ मूसलाधार बारिश से पौधों के गिरने की समस्या आ सकती है. मिर्च, टमाटर और बैंगन जैसी सब्जियों की क्यारियों में भी जलजमाव से फूल झड़ने और कीड़े लगने का खतरा बढ़ जाता है.
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नुकसान से बचने के लिए किसान अपनाएं यह तरीके
मौसम के इस बदले तेवर को देखते हुए किसानों को कुछ जरूरी सावधानियां तुरंत बरतनी चाहिए. सबसे पहला काम यह करें कि खेतों में पानी निकलने का एकदम सही इंतजाम कर लें. मेंड़ों को थोड़ा काटकर नालियां बना लें जिससे एक्सट्रा पानी बिना रुके बाहर निकल जाए. अगर आपने हाल ही में खाद डालने और कीटनाशक स्प्रे करने का सोचा है. तो इस काम दो-तीन दिन के लिए टाल दें.
बारिश के दौरान दवाइयां और यूरिया धुल जाते हैं. जिससे मेहनत और पैसा दोनों बर्बाद होता है. मौसम साफ होने के बाद ही खेतों में फफूंदनाशक का छिड़काव करें जिससे नमी की वजह से लगने वाले रोगों को वक्त रहते रोका जा सके.
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