Sheep Farming Scheme: गांवो और ग्रामीण इलाकों में खेती के साथ पशुपालन किसानों की आमदनी बढ़ाने का एक अहम जरिया है. खासकर भेड़ पालन को कम जगह और अपेक्षाकृत सीमित संसाधनों में शुरू किया जाने वाला व्यवसाय माना जाता है. ऊन और मांस के जरिए भेड़ पालक अच्छी आमदनी हासिल कर सकता है. ग्रामीण क्षेत्र में पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए सरकार की ओर से कई योजनाएं चलाई जा रही हैं. इनमें भेड़ और बकरी पालन से जुड़े लोगों के लिए भी आर्थिक सहायता का प्रावधान है. खास तौर पर राष्ट्रीय पशुधन मिशन (National Livestock Mission – NLM) के तहत कुछ पात्र लाभार्थियों को भेड़-बकरी से संबंधित गतिविधियों में 90 प्रतिशत तक सरकारी सहायता का प्रावधान है.

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भेड़ पालन के लाभ

भेड़ पालन परिवार के सदस्यों के लिए स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार का अवसर पैदा करता है. भेड़ पालन करने से दूध, मांस और ऊन प्राप्त होता है. जिससे विभिन्न माध्यम से आय की जा सकती है. वहीं भेड़ पालन दूसरे जानवर पालने से कई ज्यादा आसान और सरल होता है. यह खरपतवार को चरकर खेतों और मैदानों के प्राकृतिक तरीके से साफ करते हैं. जिससे किसान को रसायनिक खाद की जरूरत नहीं होती.

किसे मिलेगा लाभ?

NLM की परिचालन गाइडलाइन के अनुसार, वन अधिकार अधिनियम (FRA) के तहत पात्र अनुसूचित जनजाति लाभार्थियों के लिए कुछ बकरी/भेड़ प्रजनन गतिविधियों में 90 प्रतिशत तक सहायता का प्रावधान किया गया है. इसका मतलब यह है कि पात्र लाभार्थी को योजना के तहत स्वीकृत लागत का बड़ा हिस्सा सरकारी सहायता के रूप में मिल सकता है. शेष राशि लाभार्थी को स्वयं या अन्य स्वीकृत वित्तीय माध्यमों से जुटानी पड़ती है.

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ऐसे मिलेगी सहायता

भेड़ पालन व्यवसाय में शुरूआत के लिए पशुओं की खरीद, उनकी देखभाल और आवश्यक बुनियादी सुविधाओं पर खर्च होता है. सरकारी सहायता मिलने से इस खर्च को बहुत हद तक कम किया जा सकता है. इससे आपका शुरूआती खर्च कम होने में मदद मिलती है और आपको आर्थिक सहायता भी मिलती है.

ऐसे करें आवेदन

इस योजना का लाभ उठाने के लिए आप अपने क्षेत्र के पशुपालन विभाग या संबंधित सरकारी कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं. आपको वहां से योजना से जुड़ी संपूर्ण जानकारी मिल सकती है. आवेदन की प्रक्रिया राज्य के अनुसार अलग हो सकती है. ऐसे में अपने स्थानीय विभाग से जानकारी लेना उपयुक्त होगा.

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