PKVY Scheme: आज के इस दौर में जहां हर तरफ सेहत को लेकर जागरूकता बढ़ रही है वहीं मार्केट में बिना केमिकल और ऑर्गेनिक तरीके से उगी फसलों की डिमांड भी आसमान छू रही है. लोग अब अपनी थाली में शुद्ध और पौष्टिक खाना चाहते हैं. जिसके लिए वे ज्यादा कीमत देने को भी तैयार हैं. इसी ट्रेंड को देखते हुए सरकार देश के किसानों को पारंपरिक और नेचुरल फार्मिंग की तरफ मोड़ने के लिए एक बेहद शानदार स्कीम चला रही है. 

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जिसका नाम है परंपरागत कृषि विकास योजना (PKVY). यह किसानों को ऑर्गेनिक खेती अपनाने के लिए जमीन पर पूरा सपोर्ट, पैसा और सही ट्रेनिंग देती है. अगर आप भी रासायनिक खादों के भारी खर्च से परेशान हैं और अपनी मिट्टी की उपजाऊ शक्ति को हमेशा के लिए बचाना चाहते हैं तो यह सरकारी स्कीम आपकी किस्मत बदल सकती है. जान लें कैसे ले सकते हैं स्कीम में लाभ.

सरकार से मिलने वाली मोटी आर्थिक मदद

परंपरागत कृषि विकास योजना का पूरा ढांचा बहुत ही मॉडर्न और व्यावहारिक तरीके से तैयार किया गया है. इस स्कीम के तहत किसानों को अकेले काम करने के बजाय क्लस्टर यानी एक समूह में जोड़ा जाता है. जिसमें कम से कम 50 या उससे ज्यादा किसान शामिल हो सकते हैं. सरकार का सबसे बड़ा सपोर्ट यह है कि वह प्रति हेक्टेयर के हिसाब से किसानों को बड़ी वित्तीय सहायता सीधे उनके बैंक खातों में ट्रांसफर करती है. 

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जिसका एक बड़ा हिस्सा सीधे तौर पर जैविक खाद, प्राकृतिक बीज और जरूरी इनपुट्स खरीदने के लिए दिया जाता है. इसका फायदा यह होता है कि किसानों को शुरुआती दौर में अपनी जेब से भारी निवेश नहीं करना पड़ता और वे बिना किसी आर्थिक तनाव के पूरी तरह से केमिकल-फ्री खेती की शुरुआत आसानी से कर सकते हैं.

ट्रेनिंग से लेकर ऑर्गेनिक सर्टिफिकेशन 

सिर्फ पैसा देना ही इस योजना का मकसद नहीं है बल्कि किसानों को आत्मनिर्भर बनाना इसकी सबसे बड़ी यूएसपी है. इस स्कीम के जरिए किसानों को ऑर्गेनिक फार्मिंग के नए तौर-तरीके, जैसे कि जीवामृत बनाना, केंचुआ खाद तैयार करना और प्राकृतिक रूप से कीटों पर काबू पाने की मॉडर्न ट्रेनिंग एक्सपर्ट्स द्वारा दी जाती है. इसके अलावा, सबसे महत्वपूर्ण काम होता है फसलों का 'ऑर्गेनिक सर्टिफिकेशन' कराना, जिसके बिना मार्केट में असली दाम नहीं मिलता. 

मार्केट का पूरा एक्सेस

PKVY योजना के तहत सरकार किसानों के उत्पादों को पूरी तरह प्रमाणित कराने में मदद करती है. जिससे उनकी फसल को एक ब्रांड वैल्यू मिलती है. सर्टिफाइड होने के बाद किसान अपने इन प्रीमियम प्रोडक्ट्स को बड़े बाजारों और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर बहुत ऊंचे और मुनाफेदार दामों पर सीधे बेच सकते हैं.

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