Pesticide Poisoning First Aid: खेती में फसल को कीडों और बीमारियों से बचाने के लिए किसान अक्सर कीटनाशक का छिडकाव करते हैं. लेकिन छिडकाव के दौरान थोड़ी सी लापरवाही भी भारी पड सकती है. तेज हवा चलने पर दवा की बूंदें चेहरे तक आ सकती हैं और गलती से मुंह में भी चली जाती हैं. कीटनाशक शरीर में जाने पर इसका असर दवा के प्रकार और कितनी मात्रा शरीर में गई है, इस पर निर्भर करता है. कुछ कीटनाशक बहुत जहरीले हो सकते हैं और इनसे उल्टी, चक्कर, कमजोरी, सांस लेने में परेशानी, पसीना ज्यादा आना या बेहोशी जैसी समस्या हो सकती है. इसलिए अगर छिडकाव करते समय जहरीला घोल मुंह में चला जाए, तो इसे छोटी बात समझकर घर पर इलाज करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए.

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मुंह में दवा चली जाए तो सबसे पहले क्या करें

अगर कीटनाशक का घोल मुंह में चला गया है, तो सबसे पहले छिडकाव तुरंत रोककर उस जगह से दूर हो जाएं और साफ हवा वाली जगह पर जाएं. मुंह में बचा हुआ घोल थूक दें और मुंह को साफ पानी से अच्छी तरह धो लें. इसके बाद बिना देर किए डॉक्टर या नजदीकी अस्पताल से संपर्क करें.

सबसे जरूरी बात यह है कि खुद से उल्टी कराने की कोशिश न करें, क्योंकि कुछ जहरीले रसायनों में उल्टी कराने से दवा सांस की नली में जा सकती है और हालत ज्यादा खराब हो सकती है. जिस कीटनाशक का इस्तेमाल किया गया था, उसकी बोतल या पैकेट साथ लेकर अस्पताल जाएं, ताकि डॉक्टर को पता चल सके कि कौन सा रसायन शरीर में गया है. अगर व्यक्ति को सांस लेने में दिक्कत, बेहोशी, दौरे या बहुत ज्यादा कमजोरी हो रही है, तो इसे गंभीर स्थिति मानकर तुरंत अस्पताल पहुंचाना चाहिए. 

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छिडकाव करते समय इन बातों का रखें ध्यान

कीटनाशक से बचाव का सबसे अच्छा तरीका यही है कि छिडकाव करते समय सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जाए. दवा मिलाते और छिडकाव करते समय दस्ताने, मास्क, पूरे शरीर को ढकने वाले कपडे, जूते और आंखों की सुरक्षा के लिए जरूरी सामान पहनना चाहिए. हवा तेज हो तो छिडकाव करने से बचें, क्योंकि दवा की बूंदें हवा के साथ चेहरे और शरीर तक पहुंच सकती हैं. छिडकाव के दौरान खाना, पानी पीना या तंबाकू खाना भी नहीं चाहिए.

काम पूरा होने के बाद हाथ, चेहरा और शरीर के खुले हिस्सों को साबुन और पानी से अच्छी तरह साफ करें और इस्तेमाल किए गए कपडों को अलग से धोएं. कीटनाशक की खाली बोतल या डिब्बे को घर के दूसरे कामों में इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. अगर गलती से दवा मुंह में चली जाए तो AIIMS के National Poisons Information Centre की 24 घंटे चलने वाली हेल्पलाइन 1800-116-117 पर भी सलाह ली जा सकती है.

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