Noorjahan Mango Cultivation: आम को फलों का राजा कहा जाता है. देश में अलग-अलग वैरायटी के बहुत सारे आम उगाए जाते हैं. और जब बात आम की हो तो नूरजहां आम का नाम तो लेना बनता है. अपने बड़े साइज, अच्छे रंग और बेहतरीन स्वाद की वजह से यह आम देश के सबसे खास आमों में गिना जाता है. कई बार एक नूरजहां आम का वजन 2 से 4 किलो तक पहुंच जाता है. इसलिए इसे देखने वाले भी हैरान रह जाते हैं.

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यही वजह है कि बाजार में इसकी अच्छी मांग रहती है और कीमत भी सामान्य आमों से काफी ज्यादा मिलती है. मध्य प्रदेश के कुछ इलाकों में इसकी खेती सालों से की जा रही है. जहां की जलवायु और मिट्टी इसे बेहतर गुणवत्ता देती है. अगर किसान सही तरीके, सही देखभाल के साथ इसकी खेती करें तो यह आपके लिए भी एक बढ़िया बागवानी फसल साबित हो सकती है. जान लीजिए कैसे कर सकते हैं इसकी खेती.

सबसे ज्यादा कहां होती है नूरजहां आम की खेती?

नूरजहां मैंगो की सबसे ज्यादा पहचान मध्य प्रदेश के अलीराजपुर जिले के कट्ठीवाड़ा क्षेत्र से जुड़ी हुई है. यहां की जलवायु, तापमान और मिट्टी इस किस्म के लिए काफी अनुकूल मानी जाती है. यही कारण है कि देशभर में मिलने वाला असली नूरजहां आम अधिकतर इसी इलाके से आता है. इसके अलावा आसपास के कुछ सीमित क्षेत्रों में भी इसकी खेती की जाती है. लेकिन उत्पादन बहुत ज्यादा नहीं होता. 

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यह आम देर से पकने वाली किस्मों में शामिल है और आमतौर पर जून के आखिर से जुलाई के बीच बाजार में पहुंचता है. कम उत्पादन और बड़े साइज की वजह से इसकी मांग हमेशा बनी रहती है. कई व्यापारी पहले से ही बाग मालिकों से इसकी बुकिंग कर लेते हैं. अच्छी क्वालिटी का नूरजहां आम बाजार में काफी महंगा बिकता है. जिससे किसानों को नॉर्मल आम की तुलना में कमाई का बेहतर मौका मिलता है.

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नूरजहां आम की खेती कैसे करें?

अब बात करते हैं कि नूरजहां आम की खेती कैसे की जाए. तो इसके लिए अच्छी जल निकासी वाली दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त मानी जाती है. खेत में पानी रुकना नहीं चाहिए क्योंकि इससे पौधों की जड़ों को नुकसान पहुंच सकता है. पौधे लगाने का सबसे अच्छा समय मानसून की शुरुआत माना जाता है. जिससे शुरुआती बढ़वार अच्छी हो सके. पौधों के बीच दूरी रखना जरूरी है. जिससे पेड़ों को फैलने के लिए जगह मिले और धूप अच्छी तरह पहुंचे. 

समय पर सिंचाई, जैविक खाद, संतुलित उर्वरक और नियमित छंटाई से पेड़ों की सेहत बेहतर रहती है. फल बनने के दौरान कीट और रोगों की निगरानी भी जरूरी होती है. जिससे उत्पादन प्रभावित न हो. अच्छी देखभाल के बाद पेड़ कुछ सालों में अच्छे फल देने लगते हैं. 

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