इन वजहों से छोटा रह जाता है आलू का साइज, बुआई के समय जरूर रखें कुछ बातों का ध्यान

आलू की खेती में सबसे बड़ी सिरदर्दी तब होती है जब पूरी मेहनत के बाद भी आलू का साइज छोटा रह जाता है. मंडी में छोटे आलू का कोई खरीदार नहीं मिलता और किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है. आलू का साइज छोटा रहने के पीछे मौसम से ज्यादा कुछ गलतियां जिम्मेदार होती हैं.
अक्सर किसान आलू की बुआई के समय कुछ बहुत जरूरी बातों को नजरअंदाज कर देते हैं. उन्हें लगता है कि बस खेत में बीज डाल दिया और काम खत्म लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है. आलू की सही ग्रोथ की नींव बुआई के पहले कुछ बीतों पर ध्यान देना बेहद जरूरी है.
साइज छोटा रहने की सबसे पहली और बड़ी वजह होती है बेहद छोटे बीजों का चुनाव करना. अगर आपका बीज ही कमजोर होगा तो उससे निकलने वाला पौधा कभी तंदुरुस्त नहीं हो सकता. हमेशा सही और सर्टिफाइड कोल्ड स्टोरेज के अच्छे उभरी हुई आंखों वाले बीजों का ही इस्तेमाल करें.
दूसरी गलती जो अक्सर देखने को मिलती है वह है खेत में पौधों को बहुत पास-पास बो देना. ज्यादा मुनाफे के चक्कर में घनी बुआई करने से जमीन के अंदर आलू को फैलने के लिए जरूरी जगह नहीं मिल पाती. जब स्पेस ही नहीं होगा तो आलू चाहकर भी अपना नेचुरल साइज नहीं ले पाएगा.
खेत की मिट्टी का सख्त होना भी आलू का दम घोट देता है. आलू जमीन के अंदर बैठता है. इसलिए उसे बेहद भुरभुरी और ढीली मिट्टी की जरूरत होती है. अगर खेत की जुताई अच्छे से नहीं की गई है. तो सख्त मिट्टी के दबाव के चलते आलू कंचे जैसा छोटा रह जाता है.
इसके अलावा बुआई के समय खाद का सही बैलेंस न होना भी आलू का साइज बिगाड़ देता है. पौधे की शुरुआती ग्रोथ के लिए नाइट्रोजन जरूरी है. लेकिन आलू का साइज बढ़ाने का असली काम पोटाश और फास्फोरस करते हैं. अगर मिट्टी में इन पोषक तत्वों की कमी होगी तो आलू कभी नहीं फूलेगा.
अगर आप चाहते हैं कि आपके खेत से बड़े और चमकदार आलू निकलें तो बुआई के वक्त सही दूरी और भुरभुरी मिट्टी का पूरा ध्यान रखें. शुरुआत में ही गोबर की अच्छी सड़ी हुई खाद डालें जिससे मिट्टी नरम रहे. सही समय पर सही खाद देने से आलू का साइज एकदम परफेक्ट मिलेगा.