How To Keep Paneer Fresh: भारत में पनीर खाना हर कोई पसंद करता है. लेकिन पनीर बेचने वाले दुकानदारों और इसे खरीदने वाले ग्राहकों के सामने सबसे बड़ी समस्या यह होती है कि यह बहुत जल्दी खराब हो जाता है. आम तौर पर पनीर दो से तीन दिनों में खट्टा होने लगता है या उसकी महक बदल जाती है. लेकिन हाल ही में करनाल के राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान ICAR-NDRI के वैज्ञानिकों ने एक ऐसी नई तकनीक खोजी है, जिससे पनीर अब 10 दिनों तक बिल्कुल ताजा रहेगा और खराब नहीं होगा.  इस नई तकनीक का नाम AMCF तकनीक है. 

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क्या है  AMCF तकनीक?

AMCF का पूरा नाम एंटी-माइक्रोबियल सेल्युलोज फिल्म है. यह असल में एक खास तरह की पॉलीथिन जैसी दिखने वाली पैकेजिंग फिल्म है, जिसे पूरी तरह से प्राकृतिक और खाने योग्य चीजों से बनाया गया है. यह पनीर को पैक करने का एक ऐसा वैज्ञानिक और सुरक्षित रैपर है, जो पनीर को जल्दी खराब होने से बचाता है. इस फिल्म को बनाने में औषधीय पौधों के अर्क और प्राकृतिक तत्वों का इस्तेमाल किया गया है. यह दिखने में तो साधारण प्लास्टिक रैपर जैसी लगती है, लेकिन इसके गुण पनीर की उम्र को कई गुना बढ़ा देते हैं. 

यह तकनीक पनीर को कैसै रखती है ताजा?

पनीर के जल्दी खराब होने का सबसे बड़ा कारण हवा में मौजूद बैक्टीरिया, फंगस और नमी होते हैं. जब पनीर को सामान्य तौर पर रखा जाता है, तो उस पर हानिकारक बैक्टीरिया बहुत तेजी से बढ़ते हैं, जिससे पनीर से पानी छूटने लगता है और वह खट्टा हो जाता है. ICAR-NDRI की इस AMCF तकनीक में जादू इसके एंटी-माइक्रोबियल गुणों में है. क्योंकि जब पनीर को इस खास फिल्म में लपेटा जाता है, तो यह फिल्म बैक्टीरिया और फंगस को पनीर की सतह पर पनपने ही नहीं देती. यह पनीर के चारों ओर एक सुरक्षा कवच बना देती है. वैज्ञानिक जांच में पाया गया है कि इस रैपर में बंद पनीर 4 डिग्री सेल्सियस पर पूरे 10 दिनों तक अपनी शुद्धता, स्वाद और खुशबू को बरकरार रख सकता है. 

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किसानों को क्या फायदा होगा

भारत के ग्रामीण इलाकों में बिजली की समस्या या कोल्ड स्टोरेज न होने के कारण हर साल टन के हिसाब से पनीर खराब हो जाता है. अब 10 दिनों की शेल्फ लाइफ मिलने से यह बर्बादी पूरी तरह रुक जाएगी. साथ ही अब गांवों और छोटे कस्बों में बना ताजा पनीर बड़े शहरों के बाजारों तक बिना खराब हुए आसानी से भेजा जा सकेगा. इससे ट्रांसपोर्टेशन के दौरान होने वाला नुकसान खत्म हो जाएगा. कई बार छोटे हलवाई और डेयरी चलाने वाले लोग रोज उतना ही पनीर बनाते हैं जितना बिक सके, क्योंकि उन्हें खराब होने का डर रहता है. लेकिन अब वे ज्यादा मात्रा में पनीर बनाकर सुरक्षित रख सकेंगे.

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