Monsoon 2026 Updates: इस साल देश में मॉनसून की चाल ने किसानों की धड़कनें बढ़ा दी हैं. पहले तो इसने केरल में थोड़ी देरी से एंट्री मारी और अब जब लगा कि यह रफ्तार पकड़ेगा तो मौसम ने अचानक ऐसा यू-टर्न लिया कि देश के कई हिस्सों में ब्रेक लग गया. भारतीय मौसम विभाग के अनुसार, मॉनसून हरनाई, सोलापुर, हैदराबाद और मुजफ्फरपुर तक पहुंचकर अटक गया है. 

Continues below advertisement

इसका मतलब यह है कि दक्षिण और पूर्वी भारत में तो यह पहुंच चुका है. लेकिन दिल्ली-NCR, पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी यूपी और राजस्थान जैसे उत्तर भारत के इलाके अब भी इस उम्मीद में आसमान की तरफ ताक रहे हैं. इस बेरुखी की वजह से देश की खेती-किसानी पर एक बड़ा संकट मंडराने लगा है. जो खरीफ सीजन को बुरी तरह प्रभावित कर रहा है.

मॉनसून ब्रेक के पीछे अल नीनो?

केरल में देर से आने के बाद मॉनसून के अचानक थम जाने को मौसम विज्ञान की भाषा में मॉनसून ब्रेक या वीक फेज़ कहा जाता है. सैटेलाइट तस्वीरों से पता चला है कि हवाओं में नमी की कमी के कारण बादलों का फैलाव अचानक घट गया है. इसके पीछे प्रशांत महासागर में एक्टिव एल नीनो को भी जिम्मेदार माना जा रहा है जो भारत तक आने वाली मानसूनी हवाओं को कमजोर कर देता है. 

Continues below advertisement

हालांकि राहत की बात यह है कि 23 जून के आसपास मौसम को अगला पुश मिल सकता है. जिससे महाराष्ट्र, बिहार और झारखंड में यह आगे बढ़ेगा. तब तक अगले 7 दिनों में पूर्वोत्तर भारत और बिहार-बंगाल में भारी बारिश और आंधी-बिजली का अलर्ट है. जबकि उत्तर भारत को सिर्फ प्री-मॉनसून आंधी और हल्की फुहारों देखने के मिलेंगी.

कहीं बाढ़ तो कहीं सूखा

मौसम के इस अजीब असंतुलन ने देश की खेती को दो अलग-अलग मुश्किलों में झोंक दिया है. एक तरफ जहां मॉनसून पहुंच चुका है. जैसे असम, मेघालय और बिहार के कुछ इलाके, वहां भारी बारिश और जलभराव के कारण धान की तैयार नर्सरी डूबने और कटी फसलों के बर्बाद होने का खतरा पैदा हो गया है. 

दूसरी तरफ जहां मॉनसून अब तक नहीं पहुंचा है. वहां भीषण गर्मी और लू का दौर जारी है. इन सूखे इलाकों में किसानों को अपनी फसलों को बचाने के लिए महंगे साधनों से सिंचाई करनी पड़ रही है. जिससे खेती की लागत लगातार बढ़ती जा रही है. 

यह भी पढ़ें: चांदनी रात में ही सिंचाई करने को क्यों कहते हैं बुजुर्ग, इसका फसल पर क्या पड़ता है असर?

खरीफ सीजन की बुवाई अटकी

भारत में खरीफ की फसलें पूरी तरह मानसूनी बारिश पर टिकी होती हैं. इस समय देश में मॉनसून की कहानी तीन हिस्सों में उलझकर रह गई है पहले देरी से आना फिर बीच में लंबा ब्रेक लगना और अब कहीं बाढ़ तो कहीं सूखे का असमान असर दिखना. 

इस वजह से देश के बड़े हिस्से में खरीफ फसलों की बुवाई या तो पूरी तरह टल गई है या फिर किसान मजबूरी में सूखी मिट्टी में ही भारी रिस्क लेकर बुवाई कर रहे हैं. अगर आने वाले दिनों में बारिश का यह असंतुलन दूर नहीं हुआ तो सीधे तौर पर देश के कुल कृषि उत्पादन पर इसका बुरा असर पड़ेगा. 

यह भी पढ़ें: खेत में अचानक दिखें ये संकेत, समझ लेना लगने वाले हैं दीमक