देश के कई हिस्सों में रेलवे लाइन के आसपास खाली पड़ी जमीन को देखकर स्थानीय लोग अक्सर वहां खेती करने लगते हैं, यह सोचकर कि जमीन खाली पड़ी है तो इस्तेमाल कर लेने में क्या बुराई है. लेकिन कानूनी तौर पर यह एक गंभीर अपराध माना जाता है, क्योंकि रेलवे की जमीन केंद्र सरकार की संपत्ति होती है और इस पर बिना अनुमति किसी भी तरह का कब्जा या इस्तेमाल गैरकानूनी है. 

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हाल ही में उत्तराखंड के हल्द्वानी स्थित बनभूलपुरा में रेलवे की जमीन पर अतिक्रमण को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई भी हुई, जिसने एक बार फिर इस मुद्दे को सुर्खियों में ला दिया. सरकार खुद संसद में बता चुकी है कि देशभर में रेलवे की सैकड़ों हेक्टेयर जमीन पर अवैध कब्जा है. आइए जानते हैं कि रेलवे की जमीन पर खेती करने पर कानून क्या कहता है और इसके लिए कितनी सजा हो सकती है.

कौन सा कानून है लागू?

रेलवे की संपत्ति पर अवैध कब्जे से जुड़े मामलों में मुख्य रूप से रेलवे प्रॉपर्टी अनलॉफुल पजेशन एक्ट 1966 लागू होता है. इस कानून का मकसद रेलवे की संपत्ति की चोरी और गैरकानूनी कब्जे को रोकना है. इसके तहत रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स यानी आरपीएफ के अधिकारियों को बिना मजिस्ट्रेट के आदेश और बिना वारंट के भी संदिग्ध व्यक्ति को गिरफ्तार करने का अधिकार दिया गया है.

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कितनी है सजा का प्रावधान?

इस कानून की धारा 3 के मुताबिक अगर कोई व्यक्ति पहली बार रेलवे की संपत्ति पर गैरकानूनी कब्जा करता है, तो उसे 5 साल तक की कैद या जुर्माना या दोनों हो सकते हैं. अगर अदालत को कोई खास और पर्याप्त वजह नहीं मिलती कि सजा क्यों दी जाए, तो कम से कम एक साल की कैद और कम से कम 1,000 रुपये का जुर्माना जरूर लगाया जाता है. वहीं अगर कोई व्यक्ति दोबारा या बार-बार ऐसा अपराध करता है, तो सजा और भी सख्त हो सकती है, जिसमें कैद के साथ-साथ जुर्माना भी अनिवार्य रूप से लगाया जाता है.

जमीन मालिक को जानबूझकर मदद देने पर भी सजा

अगर कोई जमीन या इमारत का मालिक, कब्जेदार या उसकी देखरेख करने वाला एजेंट जानबूझकर किसी को रेलवे की संपत्ति पर अवैध कब्जा करने में मदद करता है या इसे नजरअंदाज करता है, तो उसे भी पांच साल तक की कैद या जुर्माना या दोनों की सजा हो सकती है. यानी सिर्फ जमीन पर खेती करने वाला व्यक्ति ही नहीं, बल्कि इसमें मदद करने वाला कोई भी व्यक्ति कानूनी कार्रवाई के दायरे में आ सकता है.

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व्यावहारिक तौर पर क्या होता है?

हालांकि ज्यादातर मामलों में जब कोई किसान बिना जानकारी के रेलवे की खाली जमीन पर खेती कर रहा होता है, तो शुरुआत में उसे चेतावनी देकर जमीन खाली करने को कहा जाता है, और सीधे कड़ी आपराधिक कार्रवाई कम ही होती है. लेकिन अगर बार-बार चेतावनी के बावजूद जमीन खाली नहीं की जाती, या रेलवे सुरक्षा से जुड़े संवेदनशील इलाके में कब्जा हो, तो कानूनी कार्रवाई तेज हो सकती है. 

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