Indian Farmers: देश में खेती लाखों परिवारों की रोजी-रोटी का सहारा है. लेकिन खेती से होने वाली कमाई की बात करें, तो हर राज्य के किसानों की हालत एक जैसी नहीं है. कहीं किसानों को सिंचाई की अच्छी सुविधा मिलती है, फसल बेचने के लिए मंडियां हैं और सरकारी खरीद का सहारा भी मिलता है. 

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वहीं, कई राज्यों में किसान आज भी बारिश के भरोसे खेती करते हैं. कभी सूखा तो कभी बेमौसम बारिश उनकी मेहनत पर पानी फेर देती है. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर देश के किन राज्यों में किसानों की कमाई बेहतर है और कहां उन्हें ज्यादा मुश्किलों का सामना करना पड़ता है?

पंजाब-हरियाणा में किसानों को मिलता है बेहतर सहारा

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पंजाब और हरियाणा का नाम खेती के मामले में देश के प्रमुख राज्यों में लिया जाता है. यहां गेहूं और धान की खेती बड़े पैमाने पर होती है. किसानों को ट्रैक्टर, मशीनों, ट्यूबवेल और सिंचाई के दूसरे साधनों का फायदा मिलता है. इसके अलावा, गेहूं और धान की सरकारी खरीद होने से कई किसानों को अपनी फसल बेचने का एक तय रास्ता भी मिलता है. नाबार्ड (NABARD) और संसद में पेश किए गए सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पंजाब के किसानों की औसत मासिक आय लगभग 31,433 रुपये है. वही हरियाणा के किसानों की औसत मासिक आय लगभग 25,655 से 22,841 रुपये के बीच है 

दूसरे राज्यों में भी खेती से कमाई के मौके

मेघालय समेत पूर्वोत्तर के कुछ राज्यों में बागवानी, फल, मसाले और दूसरी फसलों से कमाई के अवसर हैं. लेकिन पहाड़ी जमीन, बाजार तक पहुंच और ढुलाई की दिक्कतों के कारण हर किसान को इसका बराबर फायदा नहीं मिल पाता. 

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बिहार, झारखंड और ओडिशा के किसानों की चुनौतियां

बिहार, झारखंड और ओडिशा जैसे राज्यों के कई इलाकों में किसानों को सिंचाई, छोटी जोत और फसल बेचने से जुड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. कई किसान बारिश के भरोसे खेती करते हैं. अगर समय पर बारिश न हो या फसल तैयार होने के दौरान मौसम बिगड़ जाए, तो उनकी कमाई पर सीधा असर पड़ता है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार यहां के एक औसत किसान परिवार की कुल मासिक कमाई 4,800 से 7,600 रुपये के बीच होती है. 

कई जगहों पर किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए दूर की मंडियों तक जाना पड़ता है. इससे ढुलाई का खर्च बढ़ता है और मुनाफा घट सकता है. पश्चिम बंगाल में भी किसानों की स्थिति फसल, जमीन और इलाके के हिसाब से अलग-अलग है.

महाराष्ट्र के कुछ इलाकों में खेती जोखिम भरी

महाराष्ट्र के विदर्भ और मराठवाड़ा जैसे इलाकों में पानी की कमी और अनियमित बारिश लंबे समय से बड़ी चुनौती रही है. कपास और दूसरी फसलों की खेती करने वाले किसानों को कभी कम पैदावार तो कभी बाजार में कम भाव मिलने की परेशानी झेलनी पड़ती है. खेती की लागत बढ़ने पर कर्ज चुकाना भी मुश्किल हो सकता है.

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