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Hydroponic Farming: जो खाएं घर पर उगाएं! बिना मिट्टी इस तरीके से शुरू करें खेती, जमकर होगी पैदावार

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कविता गाडरी   |  27 Apr 2026 12:46 PM (IST)

Hydroponic Farming: हाइड्रो पोनिक खेती एक ऐसी विधि है, जिसमें पौधों को उगाने के लिए मिट्टी का इस्तेमाल नहीं किया जाता है. इसकी जगह पोषक तत्व से भरपूर पानी का घोल पौधों की जड़ों तक पहुंचाया जाता है.

Hydroponic Farming: जो खाएं घर पर उगाएं! बिना मिट्टी इस तरीके से शुरू करें खेती, जमकर होगी पैदावार

हाइड्रोपोनिक खेती

Hydroponic Farming: बदलते समय के साथ खेती के तरीके भी तेजी से बदल रहे हैं. अब ऐसे आधुनिक तरीके सामने आ चुके हैं, जिनकी मदद से लोग बिना खेत और बना मिट्टी के भी घर पर ताजा सब्जियां उगा रहे हैं. इन्हीं तरीकों में से एक हाइड्रो पोनिक खेती है जो खासकर शहरी इलाकों में तेजी से पॉपुलर हो रही है. कम जगह, कम पानी और बिना मिट्टी के होने वाले इस खेती से लोग अपने घर की बालकनी, किचन या छत पर ही सब्जियां उगा सकते हैं. क्या है हाइड्रो पोनिक खेती? हाइड्रो पोनिक खेती एक ऐसी विधि है, जिसमें पौधों को उगाने के लिए मिट्टी का इस्तेमाल नहीं किया जाता है. इसकी जगह पोषक तत्व से भरपूर पानी का घोल पौधों की जड़ों तक पहुंचाया जाता है. इस प्रक्रिया में पौधों को सीधे जरूरी पोषण मिलता है, जिससे उनकी वृद्धि तेजी से होती है और कम समय में बेहतर उत्पादन मिलता है. एक्सपर्ट्स के अनुसार, इस तकनीक में पानी का उपयोग भी पारंपरिक खेती के मुकाबले काफी कम होता है और पौधे तेजी से तैयार होते हैं. कम जगह में भी संभव है खेती हाइड्रो पोनिक खेती की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे बहुत कम जगह में भी किया जा सकता है. छोटे फ्लैट, बालकनी, किचन या कमरे के कोनों में भी इस सिस्टम को लगाया जा सकता है. यही कारण है कि शहरों में रहने वाले लोग जिनके पास जमीन नहीं है वह भी अब आसानी से इस खेती को कर पा रहे हैं. वहीं इस तकनीक में पौधों को पोषक तत्व सीधे मिलते हैं, जिससे उन्हें मिट्टी में खोज करने की जरूरत नहीं होती है. यही वजह है कि हाइड्रो पोनिक तरीके से उगाए गए पौधे पारंपरिक तरीके के मुकाबले तेजी से बढ़ते हैं और कम समय में तैयार हो जाते हैं. ये भी पढ़ें- झुलसती लू का टमाटर की फसल पर नहीं होगा असर, अपनाएं ये तकनीक और गर्मी में भी पाएं बंपर पैदावार

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कम पानी में ज्यादा उत्पादन हाइड्रो पोनिक खेती में पानी को बार-बार इस्तेमाल किया जाता है, जिससे उसकी खपत काफी कम हो जाती है. माना जाता है कि यह तकनीक पारंपरिक तरीकों की तुलना में करीब 90 प्रतिशत तक पानी का उपयोग करती है. यही कारण है कि इसे पर्यावरण के अनुकूल भी माना जाता है. वहीं उत्तराखंड के श्रीनगर गढ़वाल स्थित एक रिसर्च संस्थान में इस तकनीक से अश्वगंधा और बच जैसे पौधों को कम समय में तैयार किया गया. जहां सामान्य तरीके से इन पौधों को उगाने में एक से दो साल लगते हैं, वही है हाइड्रो पोनिक विधि से इन्हें कुछ महीनो में ही तैयार कर लिया गया.

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Published at: 27 Apr 2026 12:46 PM (IST)
Tags:Urban FarmingHydroponic farmingsoilless farminggrow vegetables at home
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