Monsoon Fruits Disease: मानसून की फुहारें जितनी खेतों के लिए राहत लेकर आती हैं, बागवानी फसलों के लिए उतनी ही मुसीबत भी साथ लाती हैं. नमी और उमस बढ़ते ही अनार और अमरूद के बागों में फंगल और बैक्टीरियल बीमारियां तेजी से पैर पसारने लगती हैं, और अगर समय रहते पहचान न हो, तो पूरी फसल चौपट होने का खतरा बन जाता है.
अनार में तेल्या रोग बना रहता है सबसे बड़ा सिरदर्द
अनार उत्पादक किसानों के लिए मानसून में सबसे बड़ी चुनौती है तेल्या रोग, जिसे ऑयली स्पॉट या बैक्टीरियल ब्लाइट भी कहा जाता है. यह एक जीवाणु जनित रोग है, जो शुरुआत में फलों पर भूरे-काले रंग के पानीदार धब्बों के रूप में नजर आता है, देखने में बिल्कुल तैलीय जैसा. बीमारी बढ़ने पर यही धब्बे स्टार या Y आकार में फैलने लगते हैं और फल अंदर से सड़ना शुरू हो जाता है. महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और गुजरात जैसे प्रमुख अनार उत्पादक राज्यों में यह रोग हर साल भारी नुकसान पहुंचाता है.
यह भी पढ़ें: Rainy Season Farming Safety Tips : बारिश के बाद खेत में भर गया है कीचड़? ये गलती पड़ सकती है जान पर भारी
पत्तियों और टहनियों पर भी दिखते हैं लक्षण
सिर्फ फल ही नहीं, तेल्या रोग का असर पत्तियों और टहनियों पर भी साफ दिखता है. पत्तियों पर भूरे धब्बे बनने लगते हैं, टहनियां झुलसी हुई नजर आती हैं, और लंबे समय तक हवा में नमी बने रहने पर संक्रमण और तेजी से फैलता है. रोग मुक्त पौधों का इस्तेमाल, बाग की साफ-सफाई और सही समय पर कवकनाशी के छिड़काव से इसे काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है.
अमरूद में उकठा रोग की पहचान कैसे करें
वहीं अमरूद के बागों में मानसून आते ही उकठा यानी विल्ट रोग के लक्षण दिखने शुरू हो जाते हैं. इसकी शुरुआत पत्तियों के हल्के पीले पड़ने से होती है. धीरे-धीरे पत्तियां समय से पहले झड़ने लगती हैं, नए पत्ते और फूल बनना बंद हो जाता है और आखिर में पूरा पौधा सूख जाता है. प्रभावित शाखाएं कठोर और पथरीली हो जाती हैं और आगे विकसित नहीं हो पातीं.
फुसैरियम फफूंद है इस बीमारी की जड़
उकठा रोग की मुख्य वजह फुसैरियम सोलानी नाम का मिट्टी-जनित फफूंद है, जो पौधे की जड़ प्रणाली को संक्रमित कर पानी और पोषक तत्वों के प्रवाह को बाधित कर देता है. यह संक्रमित पौध सामग्री और दूषित औजारों से भी तेजी से फैलता है, इसलिए एक बार बाग में घुसने के बाद इसे रोकना काफी मुश्किल हो जाता है.
समय पर निगरानी ही है सबसे कारगर बचाव
कृषि विशेषज्ञों की सलाह है कि मानसून के दौरान बागों का नियमित निरीक्षण जरूरी है. रोग प्रतिरोधी किस्मों का चुनाव, जलभराव से बचाव और लक्षण दिखते ही तुरंत विशेषज्ञ सलाह लेना, यही तीन कदम अनार और अमरूद दोनों की फसल को मानसून की इन बीमारियों से बचा सकते हैं.
यह भी पढ़ें: Tulsi Plant Care Tips : तुलसी की पूजा करते वक्त रखें ये सावधानी, वरना सूख जाएगा आपका पौधा
