How to Grow Pumpkin: अगर आपका भी फार्महाउस है और आप वहां कुछ उगाना चाहते हैं तो कद्दू की खेती बेहतरीन विकल्प हो सकती है. दरअसल, कद्दू की खेती में न तो ज्यादा मेहनत लगती है और न ही ज्यादा खर्चा होता है, फिर भी यह अच्छी पैदावार देता है. भारत कद्दू का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश है और इसका इस्तेमाल खाना बनाने के साथ-साथ मिठाई बनाने में भी किया जाता है.  यह विटामिन ए और पोटेशियम का अच्छा स्रोत होता है और आंखों की रोशनी बढ़ाने में भी मदद करता है.  यही वजह है कि बाजार में कद्दू की मांग हमेशा बनी रहती है.  आइए जानते हैं कि फार्महाउस पर कद्दू कैसे उगाया जा सकता है?

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मिट्टी और बुवाई का सही समय

कद्दू उगाने के लिए सबसे पहले सही मिट्टी और सही समय का ध्यान रखना जरूरी है. अच्छी जल निकासी वाली बलुई दोमट मिट्टी कद्दू की खेती के लिए सबसे अच्छी मानी जाती है, और मिट्टी का पीएच मान 6 से 7 के बीच होना चाहिए.  बुवाई का सबसे सही समय फरवरी-मार्च और जून-जुलाई का महीना होता है. मिट्टी तैयार करने के लिए सबसे पहले खेत की दो-तीन बार जुताई करें, ताकि मिट्टी भुरभुरी हो जाए. साथ ही खेत तैयार करते समय 25 से 30 टन प्रति हेक्टेयर गोबर की खाद या कम्पोस्ट जरूर मिलाएं, यह पौधों को शुरुआती पोषण देने में मदद करता है. 

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ऐसे करें बीज की बुवाई और पौधों की देखभाल 

मिट्टी तैयार होने के बाद बीज बोने की बारी आती है. बीज बोने से पहले बेनलेट या बाविस्टिन की हल्की मात्रा से उपचारित कर लें, ताकि मिट्टी से होने वाली बीमारियों से बचाव हो सके.  बीज बोने के लिए खेत में धोरेनुमा क्यारियां बनाई जाती हैं और इन क्यारियों के बीच चार से पांच मीटर की दूरी रखी जाती है. हर टीले पर दो बीज बोएं और बीजों के बीच लगभग 60 सेंटीमीटर की दूरी रखें. बीज को मिट्टी में करीब 1 इंच गहराई पर बोना चाहिए. बीज बोने के बाद हल्की सिंचाई जरूर करें, ताकि बीज को अंकुरित होने में मदद मिले. 

पौधे उगने के बाद उनकी देखभाल भी बहुत जरूरी है. पहली निराई-गुड़ाई बुवाई के 20 से 25 दिन बाद करनी चाहिए, और खेत को खरपतवार मुक्त रखने के लिए कुल तीन से चार बार निराई-गुड़ाई करनी पड़ती है. हर गुड़ाई के समय पौधों की जड़ों के पास मिट्टी चढ़ाते रहना चाहिए, इससे पौधों का विकास तेजी से होता है.  

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