Paddy Farming Tips: धान एक ऐसी फसल है जिसे उगने से लेकर पकने तक भरपूर पानी की जरूरत होती है. शुरुआती दौर में लगातार नमी मिलने से पौधे तेजी से मजबूत होते हैं. अगर सही समय पर रोपाई हो जाए तो फसल अच्छी होती है. यही वजह है कि बारिश शुरू होते ही खेत तैयार करने और रोपाई का काम तेज कर दिया जाता है.
बारिश शुरू होते ही रोपाई करने का सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि पौधों को प्राकृतिक रूप से वह माहौल मिल जाता है जो उनकी ग्रोथ के लिए सबसे बेस्ट है. सही समय पर पानी मिलने से पौधों की जड़ें मिट्टी को जल्दी और मजबूती से पकड़ लेती हैं. यही वजह है कि मानसून की दस्तक होते ही बिना एक दिन भी गंवाए धान लगाने का काम शुरू हो जाता है.
बारिश के साथ रोपाई क्यों होती है जरूरी?
धान के पौधों को शुरुआती दिनों में लगातार पानी से भरे हुए खेत की जरूरत होती है. जिसे खेती की भाषा में पडलिंग कहते हैं. बारिश का पानी इस काम को बहुत आसान बना देता है क्योंकि इसमें प्राकृतिक न्यूट्रिएंट्स और नाइट्रोजन की मात्रा बहुत अच्छी होती है. जो पौधों के लिए एक नेचुरल टॉनिक का काम करती है. जब बारिश के चलते खेत में पानी जमा रहता है.
तो अनचाही घास और खरपतवार को पनपने का मौका नहीं मिलता जिससे धान के पौधों को पूरा पोषण अकेले मिलता है. इसके अलावा मानसून के समय हवा में जो नमी या ह्यूमिडिटी होती है. वह धान के कल्ले फूटने में बहुत मदद करती है. अगर इस समय पानी की कमी हो जाए तो पौधों की ग्रोथ रुक जाती है और फसल कमजोर रह जाती है.
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पैदावार पर कितना पड़ता है फर्क?
धान की रोपाई का सही समय उसकी पूरी पैदावार को सीधे प्रभावित करता है. अगर रोपाई मानसून की शुरुआत में कर दी जाए तो पौधों को बढ़ने के लिए पर्याप्त वक्त मिल जाता है और बालियां भी अच्छे से भरती हैं. लेकिन अगर इसमें देरी हो जाए तो फसल का पूरा ग्रोथ साइकिल छोटा पड़ जाता है. जिससे दानों का वजन कम रह सकता है और कुल उत्पादन भी घट जाता है.
सही समय पर रोपाई होने से खेत में नमी का बैलेंस बना रहता है. जिससे खाद और उर्वरक भी ज्यादा असरदार तरीके से काम करते हैं. इसके साथ ही कीट और बीमारियों का दबाव भी काफी हद तक कम हो जाता है. यही वजह है कि किसान मौसम को देखते ही रोपाई शुरू कर देते हैं. जिससे फसल अपनी पूरी ताकत से तैयार हो सके.
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