Organic Farming Scheme: लगातार रासायनिक खादों के उपयोग से मिट्टी की उर्वरता कम हो जाती है. कीटनाशकों और रसायनों  का उपयोग खेती में होने से मानव स्वास्थ्य के लिए भी हानिकारक हो जाते हैं. रसायन वर्षा और सिंचाई के पानी के साथ मिलकर लाभकारी जीवों जैसे केंचुए आदि की मृत्यु का भी कारण बनते हैं. ऐसे में आप जैविक खाद से मिट्टी को लंबे समय तक उपजाऊ बनाए रख सकते हैं, साथ ही जैविक पदार्थ मिट्टी की जल धारण क्षमता भी बढ़ाते हैं. बाजार में ऑर्गेनिक उत्पादों की मांग और कीमत सामान्य फसलों से अधिक भी होती है.

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जान लें क्या है जैविक खेती

जैविक खेती वह खेती है, जिसमें फसल उगाने के लिए रासायनिक खाद, कीटनाशक और जहरीले रसायनों का इस्तेमाल नहीं किया जाता. इसकी जगह गोबर की खाद, वर्मी कम्पोस्ट हरी खाद और जैविक कीटनाशको जैसे प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग किया जाता है. इसका उद्देश्य मिट्टी की उर्वरता बनाए रखना, पर्यावरण की रक्षा करना और सुरक्षित व पोष्टिक भोजन पैदा करना है. यह खेती किसानों और प्रकृति दोनों के लिए फायदेमंद मानी जाती है.

जैविक खेती के लिए सरकारी मदद

सरकार किसानों की सहायता के लिए कई सरकारी स्कीम चलाती है, जिसके तहत जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए किसानों को परंपरागत कृषि योजना और राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के तहत आर्थिक सहायता दी जाती है. परंपरागत कृषि योजना के तहत सरकार द्वारा प्रति हेक्टेयर 50,000 की सहायता की जाती है, जिसमें 50,000 का 62% किसान के बैंक खाते में सीधे भेजे जाते हैं. इसकाउपयोग किसान को जैविक बीज, जैव उर्वरक, वर्मीकम्पोस्ट और जैविक कीटनाशक खरीदने के लिए किया जाता है व बाकी की राशि 19,000 हजार का उपयोग क्लस्टर निर्माण, किसानों के प्रशिक्षण, पैकेजिंग, ब्रांडिंग व बाजार तक पहुचनें में की जाती है. वहीं राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के अंतरगत किसानों को प्राकृतिक खाद व बीजामृत आदि तैयार करने के लिए 15,000 प्रति हेक्टेयर दिया जाता है.

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कौन किसान होतें पात्र?

आवेदन करने के लिए आपका  भारत का मूल निवासी होने के साथ ही किसान होना भी आवश्यक है. साथ ही आपके पास अपने नाम पर योग्य व वैध जमीन हो. वहीं यदि आपके पास 5 एकड़ से ज्यादा जमीन है तो आप इस योजना का लाभ नहीं ले पाएंगे. योजना के अंतर्गत महिला किसानों, छोटे व सीमांत किसानों और अनुसूचित जाति व जनजाति के किसनों को पहली प्राथमिकता दी जाती है. किसान का अपना बैंक खाता होना जरूरी है ताकि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफार के जरिए राशि सीधे खाते में भेजी जा सके. 

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कैसे करें आवेदन?

परम्परागत कृषि विकास योजना के तहत किसान ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों से आवेदन कर सकते हैं. ऑनलाइन आवेदन के लिए किसान जैविक खेती पोर्टल या राज्य के कृषि पोर्टल पर पंजीकरण कर जरूरी जानकारी और दस्तावेजो जमा कर सकते हैं. वहीं, ऑफलाइन आवेदन के लिए नजदीकी ब्लॉक कृषि कार्यालय, जिला कृषि विभाग या जन सेवा केंद्र में जाकर आवेदन फॉर्म भरना होता है. आवेदन के दौरान आधार कार्ड, जमीन के दस्तावेज, बैंक पासबुक, आधार से लिंक मोबाइल नंबर और पासपोर्ट साईज फोटो जैसे जरूरी दस्तावेज जमा करने होते हैं.

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