Digital Bird Repellent System: खेतों में फसलों को आवारा पशुओं और नीलगायों से बचाना तो बड़ी चुनौती है ही लेकिन चिड़ियों और अन्य पंछियों का झुंड भी पूरी की पूरी मेहनत पर पल भर में पानी फेर देता है. पहले के समय में किसान भाई अपने खेतों में घास-फूस और मटके से बना पुराना पुतला यानी बिजुका खड़ा कर देते थे. लेकिन अब इस दिक्कत का पक्का तोड़ निकालने के लिए अब मार्केट में डिजिटल पुतला आ गया है.

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जिसे खेती का एक बेहतरीन गैजेट माना जा रहा है. यह कोई नार्मल पुतला नहीं है बल्कि एक ऐसी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस है जो खेत के आसपास एक भी पंछी को फटकने नहीं देती. अगर आप भी चिड़ियों के आतंक से परेशान रहते हैं और अपनी फसल की पाई-पाई बचाना चाहते हैं तो यह नई टेक्नोलॉजी आपके बहुत काम आने वाली है.

ऐसे करता है रखवाली का काम

यह डिजिटल पुतला पूरी तरह से मार्डन टेक्नोलॉजी पर काम करता है. इसमें पावरफुल मोशन सेंसर और साउंड सिस्टम लगा होता है. जैसे ही कोई पंछी या जानवरों का झुंड खेत की तरफ बढ़ता है. इसके सेंसर तुरंत उन्हें भांप लेते हैं. 

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निकालता है अलग-अलग आवाजें

इसके बाद यह डिवाइस ऐसी अलग-अलग डरावनी आवाजें, जैसे बाज की चीख, पटाखों का धमाका या शिकारी जानवरों की आवाजें निकालना शुरू कर देती है. जिससे पंछी डरकर तुरंत भाग जाते हैं. यह पूरे खेत की चौबीसों घंटे बिना थके पहरेदारी करता है.

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कम बजट में परमानेंट जुगाड़ 

इस डिजिटल पुतले की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसे चलाने के लिए आपको बिजली के भारी-भरकम बिल की कोई टेंशन नहीं लेनी है. क्योंकि यह पूरी तरह से सोलर प्लेट और इनबिल्ट बैटरी से चलता है. यानी एक बार खेत में इंस्टॉल करने के बाद यह खुद ही धूप से चार्ज होता रहता है. 

जानिए इसकी कीमत

अगर इसकी कीमत की बात करें तो बाजार में अलग-अलग रेंज और क्षमता के हिसाब से यह डिजिटल पुतला करीब 3500 रुपये से लेकर 8000 के बीच बहुत आसानी से मिल जाता है. हर साल फसलों के होने वाले हजारों रुपये के नुकसान और दिन-रात की रखवाली की मेहनत को देखा जाए तो यह  तरीका किसानों के लिए बेहद सस्ता जुगाड़ साबित हो रहा है.

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