Agricultural Export Process: भारत देश में कृषि का कितना बड़ा योगदान है, इसका अंदाजा आप इस बात से लगा सकते है कि भारत की करीब आधी आबादी खेती पर निर्भर है. ऐसे में कई साल से हमारे किसान अपनी फसल बेचने के लिए स्थानीय मंडियों पर निर्भर रहे हैं. अब समय बदल रहा है. आज के डिजिटल दौर में सिर्फ मंडियों के भरोसे रहना पुराना कल्चर बन चुका है. सरकार और नई टेक्नोलॉजी की मदद से अब भारत के छोटे और बड़े किसान अपनी फसल को सीधे विदेशी बाजारों में बेच सकते हैं. ऐसा करने से न सिर्फ उन्हें अपनी फसल का दोगुना दाम मिलता है, बल्कि बिचौलियों से भी छुटकारा मिल जाता है. 

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सही फसल का चुनाव

विदेश में माल भेजने का पहला कदम है यह तय करना कि आपको क्या बेचना है. जैसे कि भारत के आम, केले, चावल, प्याज, लहसुन और मसालों की विदेशों में भारी मांग रहती है. इसके लिए आपको यह रिसर्च करनी होगी कि आप जो फसल उगाते हैं, उसकी मांग किस देश में सबसे ज्यादा है. इसके लिए आप इंटरनेट की मदद ले सकते हैं या कृषि अधिकारियों से सलाह ले सकते हैं.

जरुरी कागजात बनवाएं

जैसे देश में गाड़ी चलाने के लिए लाइसेंस चाहिए होता है, वैसे ही विदेश में सामान भेजने के लिए एक खास कोड की जरूरत होती है. इसे IEC-Import-Export Code यानी आयात-निर्यात कोड कहते हैं. यह कोड विदेश व्यापार महानिदेशालय द्वारा जारी किया जाता है. इसे पाने की प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन और बहुत आसान है. इसके लिए किसान के पास अपना पैन कार्ड, एक बैंक खाता और बिजनेस का पता होना चाहिए. एक बार यह कोड मिल जाने के बाद यह हमेशा के लिए मान्य रहता है.

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एपेडा में रजिस्ट्रेशन कराएं

अनाज, फल और सब्जियां जैसी कृषि चीजों को विदेश भेजने के लिए भारत सरकार की एक संस्था है, जिसका नाम है APEDA यानी कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण. IEC कोड मिलने के बाद किसानों को एपेडा की वेबसाइट पर जाकर अपना रजिस्ट्रेशन कराना पड़ता है. दरअसल एपेडा संस्था किसानों को विदेशी खरीदार ढूंढने में मदद करती है और यह भी बताती है कि विदेश भेजने के लिए सामान की क्वालिटी कैसी होनी चाहिए. 

फसल की क्वालिटी

विदेशी बाजारों में सामान बेचने के लिए फसल की क्वालिटी देखी जाती है. क्योंकि विदेशी खरीदार हमेशा साफ-सुथरा, एक ही साइज का और सुरक्षित सामान पसंद करते हैं. इसलिए फसल की अच्छी तरह सफाई और ग्रेडिंग करना जरूरी होता है. साथ ही पैकिंग ऐसी करे ताकि रास्ते में सामान खराब न हो, क्योंकि फल और सब्जियां जल्दी सड़ जाती हैं. फसलों की जांच के लिए एक फाइटोसैनिटरी सर्टिफिकेट भी लेना पड़ता है. जो यह साबित करता है कि आपकी फसल में कोई बीमारी या कीड़े नहीं हैं. 

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