खेती में बीमारी चुपके से शुरू होती है और कुछ ही दिनों में पूरे खेत में फैल सकती है. फसल कोई भी हो, रोग लगने का एक पैटर्न होता है. यह मौसम, नमी और पौधे की उम्र पर निर्भर करता है. अगर किसान को लक्षण और सही समय की जानकारी हो, तो वह नुकसान से बच सकता है. समझें कि फसलों में कब कौन सी बीमारी आती है, उसके लक्षण क्या होते हैं और उसकी पहचान कैसे करें. 

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रोग कितने तरह के होते हैं और कब बढ़ते हैं

फसल के रोग मुख्य रूप से तीन तरह के कारणों से होते हैं, फफूंद, जीवाणु और विषाणु. फफूंद वाले रोग सबसे आम हैं. ये नमी, बादल और हल्की ठंड या गर्मी के मौसम में तेजी से फैलते हैं. जीवाणु वाले रोग अक्सर बारिश और खेत में भरे पानी से फैलते हैं. विषाणु वाले रोग आमतौर पर रस चूसने वाले कीटों के जरिए पौधों में पहुंचते हैं. यानी जब मौसम में नमी बढ़े, लगातार बादल रहें या खेत में पानी रुके, तो समझ जाएं कि बीमारी का खतरा बढ़ गया है.

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पौधे की हर अवस्था में अलग खतरा

बीमारी का खतरा पौधे की हर अवस्था में बदलता रहता है. बुवाई के बाद अंकुरण के समय बीज या जड़ें सड़ने का खतरा बढ़ जाता है और पौधे उगते ही सूख सकते हैं. बढ़वार के समय पत्तियों पर धब्बे, पीलापन या सफेद-पीला चूर्ण जैसी परत दिखने लगती है. फूल और फल आने के समय फूल झड़ते हैं, फल पर दाग पड़ते हैं और दाने ठीक से नहीं भरते. कटाई के बाद भंडारण में नमी रह जाए, तो उपज में फफूंद लग जाती है.

पत्तों, तने और जड़ पर ऐसे पहचानें लक्षण

पत्तों पर छोटे या गोल धब्बे, धारियां या पीले फफोले दिखें तो यह रोग का शुरुआती संकेत होता है. कई बार पौधे को छूने पर हाथ में पीला या सफेद पाउडर लग जाता है. पत्तियां समय से पहले सूखने लगें या मुड़ जाएं, तो भी सतर्क हो जाएं. तने के निचले हिस्से पर पानी की सतह के पास भूरे या काले धब्बे बीमारी की निशानी होते हैं. पौधा बिना वजह मुरझा जाए या जड़ के पास की मिट्टी में सड़न दिखे तो जड़ का रोग हो सकता है.

बचाव के आसान तरीके और कब लें सलाह

बीमारी रोकने का सबसे अच्छा तरीका है, खेत की नियमित निगरानी. बुवाई से पहले बीज का उपचार करें. जहां मिलें, रोग रोधी किस्में चुनें. खेत में पानी जमा न होने दें. कटाई के बाद बीमार पौधों के अवशेष हटा दें और फसल बदल-बदलकर बोएं. लक्षण दिखते ही नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र या कृषि विशेषज्ञ से संपर्क करें. दवा का छिड़काव अपने मन से न करें. विशेषज्ञ की बताई मात्रा और समय का ही पालन करें.

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