Cotton Intercropping Tips: कपास की खेती करने वाले किसान अक्सर इस बात से परेशान रहते हैं कि फसल को तैयार होने में लंबा वक्त लगता है और इस दौरान खेत का एक बड़ा हिस्सा खाली पड़ा रहता है. अगर आप भी यही सोच रहे हैं तो आपके बता दें इस खाली पड़ी जमीन का सही इस्तेमाल करने के लिए इंटरक्रॉपिंग बढ़िया जुगाड़ है. अगर आप कपास की दो लाइनों के बीच बची हुई खाली जगह में सही फसलों का चुनाव कर लें. 

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तो एक ही बार की लागत और मेहनत में आपकी कमाई सीधे दोगुनी हो सकती है. इस कमाल के फॉर्मूले को अपनाकर आप न सिर्फ अपने खेत की उपजाऊ शक्ति को बढ़ा सकते हैं. बल्कि मुख्य फसल के साथ-साथ बोनस मुनाफा भी कमा सकते हैं. जान लीजिए कैसे किया जा सकता है कपास के साथ दूसरी फसलें लगाकर मुनाफा डबल. 

दलहनी फसलें बढ़ाती हैं मुनाफा

कपास के पौधों को शुरुआती दिनों में बढ़ने के लिए काफी जगह चाहिए होती है और इसी खाली स्पेस का फायदा उठाने के लिए उड़द, मूंग या लोबिया जैसी कम समय वाली दालों की बुवाई कर सकते हैं. यह फसलें मात्र 60 से 65 दिनों में पककर तैयार हो जाती हैं यानी जब तक आपकी कपास की फसल बड़ी होगी. तब तक आप दालों की कटाई करके मार्केट से अच्छा मुनाफा कमा चुके होंगे. 

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इस तरीके से सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि दलहनी पौधों की जड़ें हवा से नाइट्रोजन लेकर मिट्टी में फिक्स करती हैं. जिससे जमीन को नेचुरल खाद मिल जाती है. और इससे कपास जो कि आपकी मुख्य फसल है उसे भी एक्स्ट्रा न्यूट्रिशन मिलता है और बाजार से महंगी यूरिया या डीएपी खरीदने का आपका भारी-भरकम खर्चा पूरी तरह से बच जाता है.

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हरी सब्जियां और तिलहन से भी फायदा

दालों के अलावा कपास की कतारों के बीच खाली जगह में मूंगफली या फिर चौलाई और धनिया जैसी कम समय वाली हरी सब्जियों की खेती करना बढ़िया आइडिया है. सब्जियां बहुत जल्दी तैयार हो जाती हैं. जिसे किसान हर हफ्ते बेचकर नगद पैसा कमा सकते हैं और रोज के घरेलू खर्चे आसानी से निकल आते हैं. 

मूंगफली की फसल इसके साथ बेहतर ऑप्शन है. इससे तेज धूप में भी मिट्टी की नमी लंबे समय तक बरकरार रहती है और पानी की बचत होती है. इसके साथ ही खेत में पूरा कवर होने की वजह से खरपतवार यानी अनचाही घास को पनपने का मौका ही नहीं मिलता.

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