Animal Diet Tips: मानसून का सीजन आते ही मौसम में होने वाला बदलाव इंसानों के साथ-साथ दुधारू पशुओं की सेहत पर भी सीधा असर डालता है. इस मौसम में हवा में उमस और नमी बहुत ज्यादा बढ़ जाती है. जिससे डेयरी फार्मर्स के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह आती है कि उनके पशुओं का दूध उत्पादन अचानक कम होने लगता है. अक्सर लोग समझ नहीं पाते कि सब कुछ ठीक होने के बाद भी दूध का ग्राफ नीचे क्यों गिर रहा है.

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लेकिन इसकी असली वजह होती है उनकी पुरानी डाइट. बरसात के दिनों में पशुओं का मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है जिससे उन्हें खाना पचाने में दिक्कत आती है. ऐसे में अगर आप वक्त रहते उनके खान-पान में कुछ जरूरी बदलाव नहीं करते तो आपको भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है. इस मौसम में उनकी डाइट को थोड़ा बदल लें जिससे उनकी इम्यूनिटी भी मजबूत रहे और दूध का प्रोडक्शन भी लगातार बना रहे.

हरे चारे और सूखे भूसे का सही तालमेल 

बरसात के मौसम में चारों तरफ हरा चारा आसानी से मिलने लगता है, जिसे देखकर अक्सर किसान भाई अपने पशुओं को जरूरत से ज्यादा हरा चारा खिलाने लगते हैं. लेकिन आपको यह जानकर हैरानी होगी कि इस मौसम के नए और मुलायम हरे चारे में पानी की मात्रा बहुत ज्यादा होती है और फाइबर कम होता है. अगर पशु सिर्फ यही चारा खाएगा तो उसे पेट दर्द, गैस और दस्त जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं. 

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जिससे दूध का उत्पादन सीधे तौर पर प्रभावित होता है. इस समस्या से बचने का सबसे बेस्ट जुगाड़ यह है कि आप हरे चारे के साथ सूखे भूसे या कड़बी का एक सही अनुपात बनाकर ही उन्हें खिलाएं. चारे को हमेशा थोड़ा सुखाकर या धूप दिखाकर देना ज्यादा बेहतर रहता है, ताकि उसमें मौजूद एक्स्ट्रा नमी कम हो सके और पशु का हाजमा एकदम दुरुस्त रहे.

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फीड सप्लीमेंट्स जरूर दें

दूध का उत्पादन बरकरार रखने के लिए केवल चारा ही काफी नहीं है बल्कि इस उमस भरे मौसम में पशुओं के शरीर में मिनरल्स की कमी को पूरा करना भी बेहद जरूरी है. मानसून में पशुओं को रेगुलर बेसिस पर अच्छी क्वालिटी का मिनरल मिक्सचर और नमक देना शुरू कर दें क्योंकि यह उनके डाइजेशन को बेहतर करता है और दूध बढ़ाने में मदद करता है. 

साफ-सफाई का खास ध्यान रखें

इसके साथ ही इस मौसम में फंगस और बैक्टीरिया बहुत तेजी से पनपते हैं. इसलिए पशुओं के दाने या खली को हमेशा सूखी जगह पर स्टोर करें और ध्यान रखें कि उसमें सीलन न आए. पीने का पानी हमेशा पूरी तरह साफ और ताजा होना चाहिए.

क्योंकि गंदा पानी सीधे तौर पर पशुओं को बीमार कर सकता है. अगर आप उनके खाने-पीने की स्वच्छता और इन छोटे-छोटे सप्लीमेंट्स का ध्यान रखेंगे तो मानसून में भी आपके डेयरी बिजनेस का मुनाफा कम नहीं होगा.

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