Aloe Vera Farming: आज के समय में कृषि क्षेत्र में पारंपरिक फसलों के साथ-साथ औषधीय और कम पानी चाहने वाली फसलों का चलन तेजी से बढ़ रहा है. इसी कड़ी में एलोवेरा की खेती किसानों के लिए एक बेहद मुनाफे का सौदा साबित हो रही है. कॉस्मेटिक्स, आयुर्वेदिक दवाइयों और हेल्थ ड्रिंक्स में इसकी भारी मांग के कारण इसकी खेती से बंपर लाभ कमाया जा सकता है. अगर आप भी एलोवेरा की खेती शुरू करने की सोच रहे हैं, तो आइए जानते हैं इसके आसान और सही तरीके के बारे में ए टू जेड जानकारी. 

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कम पानी और कम उपजाऊ जमीन में भी होती है खेती

एलोवेरा की खेती के लिए बहुत ज्यादा उपजाऊ जमीन या ज्यादा पानी की जरूरत नहीं होती है. यह बंजर, पथरीली और हल्की रेतीली मिट्टी में भी आसानी से उग जाता है. बस यह ध्यान रखना जरूरी है कि खेत में पानी बिल्कुल नहीं रुकना चाहिए, क्योंकि जलभराव से इसकी जड़ें सड़ सकती हैं. साथ ही इसके विकास के लिए गर्म और शुष्क जलवायु सबसे अच्छी मानी जाती है.

वहीं, इसको उपजाने के लिए खेत की तैयारी करना भी बेहद आसान है. खेत की एक से दो बार अच्छी जुताई करके मिट्टी को भुरभुरा बनाकर और पाटा लगाकर खेत को समतल बनाने की जरूरत होती है. साथ ही इसके पौधे लगाने का सबसे सही समय जुलाई से अगस्त यानी वर्षा ऋतु का शुरुआती दौर होता है. इसके साथ ही पौधों की रोपाई करते समय पौधे से पौधे के बीच लगभग 60x45 सेमी की दूरी रखनी चाहिए ताकि उन्हें फैलने के लिए पर्याप्त जगह मिल सके. 

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कब करें कटाई और कैसे होगी बंपर कमाई

एलोवेरा एक ऐसा पौधा है जिसे बहुत कम देखरेख और खाद-पानी की जरूरत होती है. खेत तैयार करते समय थोड़ी गोबर की सड़ी हुई खाद मिलाना फायदेमंद रहता है, और रासायनिक खादों की इसमें ज्यादा आवश्यकता नहीं होती. शुरुआत में हल्की सिंचाई की जरूरत होती है, लेकिन पौधे स्थापित होने के बाद इसे बहुत कम पानी चाहिए होता है, और बरसात के दिनों में तो सिंचाई की बिल्कुल जरूरत ही नहीं पड़ती. 

साथ ही इसकी फसल से कमाई भी काफी अच्छी होती है. पौधे लगाने के लगभग 8 से 10 महीने बाद इसकी पत्तियां कटाई के लिए तैयार हो जाती हैं. एक बार पौधा तैयार होने के बाद आप साल में 3 से 4 बार इसकी पत्तियों को काट सकते हैं. इन पत्तियों को सीधे आयुर्वेदिक कंपनियों, हर्बल उत्पाद बनाने वाली फैक्ट्रियों या स्थानीय मंडियों में बेचकर बंपर मुनाफा कमा सकते हैं.

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