कॉकरोच जनता पार्टी ने नीट पेपर लीक के खिलाफ आंदोलन किया था, जिसके तहत CJP ने सरकार से 3 मांग की थी. शिक्षा मंत्री का इस्तीफा, सुसाइड करने वाले छात्रों के परिवार को मुआवजा और आंदोलन में शामिल छात्रों पर कार्रवाई न करने की मांग. इन तीन मांगों में एक पूरी हो गई, जिसके तहत धर्मेंद प्रधान को शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा देना पड़ गया. हालांकि, बाकी की 2 मांगे अभी पूरी नहीं हुई है. इस बीच CJP के प्रवक्ता सौरव दास ने छात्रों को धमकाने और उनके खिलाफ कार्रवाई करने के आरोपों को लेकर सरकार पर सवाल उठाए हैं.

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सौरव दास ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह ने सरकार की ओर से यह भरोसा दिया था कि प्रदर्शन में शामिल छात्रों के खिलाफ कोई नई एफआईआर दर्ज नहीं की जाएगी. उन्होंने यह भी कहा था कि जो एफआईआर पहले से दर्ज हैं, उन्हें वापस लिया जाएगा और भविष्य में छात्रों के खिलाफ किसी तरह की बदले की भावना से कानूनी कार्रवाई नहीं होगी.

सौरव दास ने बताया कि सरकार ने इन बातों को लिखित रूप में देने का आश्वासन दिया था और इसके लिए एक समय सीमा भी तय की गई थी. उन्होंने कहा कि उस समय सीमा का आखिरी दिन अब आ गया है और वे सरकार की ओर से लिखित आश्वासन का इंतजार कर रहे हैं.

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बिहार में 500 छात्रों पर FIR

बता दें कि देश के कई बीजेपी शासित राज्यों में सैकड़ों की संख्या में छात्रों के खिलाफ FIR किए गए हैं. इस संबंध में  सौरव दास ने कहा कि उन्हें जानकारी मिली है कि केवल बिहार में ही लगभग 500 एफआईआर दर्ज की गई हैं और इनमें गंभीर धाराएं लगाई गई हैं. उन्होंने कहा कि सरकार ने छात्रों और युवाओं से जो वादा किया था, उसे निभाना चाहिए. उनके मुताबिक यह शर्त केवल दिल्ली तक सीमित नहीं थी, बल्कि बीजेपी शासित राज्यों और बीजेपी के सहयोगी दलों की सरकार वाले राज्यों पर भी लागू होनी चाहिए थी. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हर जगह छात्रों के साथ किए गए वादों का पालन हो.

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