मुमताज के दूसरे नाम कुदसिया बेगम या आलिया बेदम थे

उनकी मौत 40वें साल में सन 1631 में बुरहानपुर में हुई थी

उनकी शादी 14 साल की उम्र में शाहजहां से तय हुई थी

इनकी याद में ही शाहजहां ने ताजमहल का ऐलान किया था

मुमताज महल 14 बच्चों की मां बनी थी

ये फारसी में कविताएं भी लिखती थी

साथ ही ये हमेशा गरीबों की मदद के लिए तैयार रहती थी

मुमताज के तीन बार दफन हुए थे

मुगल सल्तनत के सबसे कीमती शाही मुहर और शाही फरमान उन्हीं के पास रहते थे

मुमताज शतरंज की भी काफी अच्छी खिलाड़ी थी.