सिंदूर लगाने या सिंदूरदान का इतिहास लगभग पांच हजार साल पहले का माना जाता है.



पार्वती अपने पति शिवजी को बुरी शक्तियों से बचाने के लिए सिंदूर लगाती थीं.



सीता अपने पति राम की लंबी उम्र की कामना तथा मन की खुशी के लिए सिंदूर लगाती थीं.



एक मान्यता भी है कि लक्ष्मी का पृथ्वी पर पांच स्थानों पर वास है.



इनमें से एक स्थान सिर भी है,



इसलिए विवाहित महिलाएं मांग में सिंदूर भरती हैं,



ताकि उनके घर में लक्ष्मी का वास हो और सुख-समृद्धि आए.



इसका सबसे बड़ा महत्व एक स्त्री के लिए उसके पति की लंबी उम्र की कामना और विवाहित होने के दर्जे से ही है.