महाभारत में एक से बढ़कर एक योद्धा मौजूद था.



प्रत्येक मनुष्य की नजरों में अलग-अलग योद्धा श्रेष्ठ हो सकते हैं.



कुछ लोग अर्जुन को सर्वश्रेष्ठ मानते हैं तो कोई कर्ण को.



अर्जुन का साथ तो स्वयं जगत के पालनहार श्री कृष्ण दे रहे थे.



लेकिन कर्ण के साथ सिर्फ दुर्योधन था.



वही अर्जुन पूर्ण रूप से श्री कृष्ण पर निर्भर थे तो दुर्योधन कर्ण पर निर्भर थे.



पांडवों और कौरवों को गुरु द्रोण ने संपूर्ण शिक्षा दी थी लेकिन कर्ण को नहीं.



कर्ण ने छल से बची हुई शिक्षा परशुराम से हासिल की थी.



कर्ण एक सच्चा मित्र और दानवीर भी था इस बात की पुष्टि स्वयं श्री कृष्ण ने की है.



उन्होंने जरासंध को अकेले हरा दिया था.