ताबूत-ए-सकीना इस्लाम धर्म के महत्वपूर्ण इतिहासिक और



धार्मिक घटना के संबंध में प्रसिद्ध है.



इसे उर्दू भाषा में ताबूत-ए-सकीना या ताबूत-ए-मुबारक कहा जाता है,



जिसका अर्थ होता है शांति की संदूक या मुबारक चेस्ट.



यह शमशाद की लकड़ी का एक संदूक था,



जो सबसे पहले हजरत आदम अलैहिस्सलाम के पास था,



उनके बाद ये इसराइल के कब्जे में रहा.



कुराने करीम के मुताबिक बुजुर्गो के तबर्रुकात अल्लाह को भी पसंद है.



और वो अपने फरिश्तों के जरिये इसकी हिफाजत भी करता है.