ट्रेन इतनी भारी होती है, उसके बावजूद भी ट्रैक नहीं टूटता.

Published by: एबीपी यूटिलिटी डेस्क
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ट्रेन को देखने पर ये लगता है कि ट्रेन का पूरा वजन एक ही जगह पड़ता है.

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आइये जानते है कि इसके पीछे की वजह क्या है?

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असलियत में ट्रेन का वजन उसके कई पहियों और बोगियों में बंटा होता है.

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सभी पहिए मिलकर ट्रैक के वजन को रेल की पटरियों में समान रूप से बटे होते हैं.

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रेल की पटरियां इस भार को नीचे लगे स्लीपर्स तक पहुंचाती हैं.

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उसके बाद स्लीपर्स वजन को बैलेंस करके जमीन में फैला देती है.

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ये भार जमीन तक पहुंचता है जिससे किसी एक खास जगह पर ज्यादा दबाव नहीं पड़ता.

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इसमें खास बात ये है कि एक पहिए और रेल के बीच का कॉन्टैक्ट एरिया बहुत छोटा होता है.

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इसके बावजूद भी सभी पटरियां मिलकर हजारों टन के ट्रेन का भार संभाल लेते हैं.

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