वैज्ञानिकों के अनुसार ब्रह्मांड की रचना एक सर्वव्यापी विस्फोट के साथ हुई थी,
तब से यह अंदर से बाहर की ओर निरंतर फैलता जा रहा है.


ब्रह्म देव को ब्रह्मांड का पिता और सृष्टि को रचने वाला देवता माना जाता है.
उनकी उत्पत्ति भगवान नारायण के नाभिकमल से हुई थी.


सनातन धर्म के अनुसार ब्रह्मा जी सृजन के देव हैं,
ये भगवान विष्णु व महेश के साथ त्रिदेवों में शामिल हैं.


पुराणों में ब्रह्मा जी विस्तृत का वर्णन किया गया है.
पुराणों के अनुसार ब्रह्मा जी के पांच मुख थे.


उनका पांचवा मुख भगवान शंकर ने क्रोध में आकर काट दिया था,
क्योंकि ब्रह्मा जी द्वारा असत्य बोला गया था.


इसके बाद से उनके चार मुख ही है जो चार दिशाओं में देखते हैं.
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, हर वेद ब्रह्मा के एक मुंह से निकला था.


चार मुख वाले ब्रह्म जी को भागवत तत्व का उपदेश चार श्लोकों में मिला,
इसे चतु:श्लोकी भागवत कहा जाता है.


ब्रह्म जी के चार मुंह और चार हाथ हैं,
इनमें वे वरमुद्रा, अक्षर सूत्र, वेद और कमण्डल धारण किए हुए हैं.


अपने शरीर के अंशों से ही ब्रह्म जी ने मनु और शतरूपा की उत्पत्ति की,
जिनसे फिर मनुष्य की उत्पत्ति हुई.