सुदर्शन चक्र को भगवान विष्णु का प्रमुख शस्त्र है. इसकी खासियत है कि ये लक्ष्य साधने के बाद वापिस अपने स्थान पर आ जाता है.

दैत्यों से संहार के लिए सुदर्शन चक्र भगवान शिव ने विष्णु जी को प्रदान किया था. समस्त सृष्टि में इससे बचने की कोई जगह नहीं.

पुराणों के मुताबिक सुदर्शन चक्र एक सेकंड में लाखों बार घूमता है. इसका वजन 2200 किलो माना गया है.

कहते हैं कि सुदर्शन चक्र में दो पंक्तियां होती है, जिसमें लाखों कीलें विपरीत दिशाओं में घूमकर दुष्टों का नाश करती है.

भगवान विष्णु ने असुरों का वध करने माता पार्वती को सुदर्शन चक्र दिया था. कई देवी-देवताओं से होता हुआ ये परशुराम जी के पास पहुंचा.

अंत में सुदर्शन चक्र श्रीकृष्ण के हाथ में सुशोभित हुआ. कहते हैं जब श्री कृष्ण ने देह त्याग किया तब सुदर्शन चक्र वही धरती में समा गया.

ऋग्वेद के अनुसार सुदर्शन चक्र, समय के चक्र को कहा गया है. श्रीहरि समय के अंतराल का उपयोग कर शत्रु को शक्तिहीन कर देते हैं.

महाभारत में भी जब श्री कृष्ण ने अर्जुन को विराट रूप दिखाया था तब सुदर्शन चक्र के इस्तेमाल से ही समय को रोक दिया था.

श्रीहरि ने सुदर्शन चक्र से ही देवी सती की देह के टुकड़े किए थे, ताकि शिव जी का मोह भंग हो सकें.