दुनिया के सबसे बड़े देश रूस और पश्चिमी एशियाई देश सऊदी अरब की अगुवाई वाले ओपेक प्लस (OPEC+ Countries) ने ऐसा फैसला लिया है जिससे भारत को नुकसान होगा. आइए जानते हैं कि इन देशों ने आखिर ऐसा क्या किया है?



रूस और सऊदी अरब समेत ओपेक प्लस (OPEC + Countries) के सदस्य देशों ने अचानक से तेल उत्पादन में कटौती की घोषणा कर दी है.



ओपेक प्लस के सदस्य देशों द्वारा तेल उत्पादन में कटौती से अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल (कच्चे तेल) की कीमत 8% तक बढ़ गई है. और, अभी भी तेल की कीमत में लगातार बढ़ोतरी हो रही है.



कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी की बात करें तो 13 अप्रैल को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 87 डॉलर प्रति बैरल को पार कर गई है.



कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का भारत पर बुरा असर पड़ेगा क्योंकि अब यहां पेट्रोलियम ऑयल महंगा होगा, जिसके चलते देश में पेट्रो-कंपनियां पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाएंगी.



भारत पिछले एक साल से अधिक समय से रूस से लगातार तेल आयात कर रहा है. और, सऊदी अरब इस साल मार्च में कच्चे तेल का भारत का दूसरा सबसे बड़ा सप्लायर रहा है.



भारत फिलहाल रूस से सस्ती कीमतों पर कच्चा तेल खरीद रहा है, लेकिन तेल उत्पादन में कटौती के ऐलान के बाद रूसी कच्चे तेल की कीमत में भी बढ़ोतरी हो रही है.



मार्च में भारत को रूस से कच्चे तेल का आयात हर दिन के हिसाब से 1.64 मिलियन (16 लाख 40 हजार) बैरल रहा. इस तरह भारत ने इराक से भी दोगुना तेल रूस से खरीदा.



आपको बता दें कि भारत अपनी जरूरतों का 80% तेल दूसरों से आयात करता है. जिसमें मार्च महीने में भारत ने कच्चे तेल के आयात का 34% तेल अकेले रूस से खरीदा.



24 देशों का संगठन है ओपेक प्लस (Opec+). इस ग्रुप में सऊदी अरब समेत 13 ओपेक देश हैं, जबकि 11 अन्य गैर-ओपेक देश हैं.



सऊदी अरब, ईरान, इराक और वेनेजुएला जैसे 13 प्रमुख तेल उत्पादक देशों के संगठन ओपेक (Opec) को 'कार्टेल' कहा जाता है.



ओपेक प्लस में सऊदी का दबदबा माना जाता है. और, ओपेक में शामिल सदस्य देश कुल वैश्विक तेल उत्पादन का लगभग 44% उत्पादन करते हैं.