संक्रांति अर्थात सूर्य का एक से दूसरी राशि में संक्रमण करना
वहीं जिस राशि में सूर्य जाते हैं उस नाम से संक्रांति मनाई जाती है.


मकर संक्रांति और उत्तरायण दोनों ही सूर्य से संबंधित पर्व है.
इस दिन सूर्य पूजा और दान करने से अक्षय पुण्य मिलता है.


पौष महीने में सूर्य मकर राशि में प्रवेश करते हैं, इस दिन को मकर
संक्रांति के नाम से जाना जाता है. ये दिन बहुत खास होता है.


मकर संक्रांति को देश के अलग-अलग राज्यों में विभिन्न तरीके
से मनाया जाता है. इसे उत्तरायण भी कहते हैं.


उत्तरायण अर्थात सूर्य जब मकर राशि में प्रवेश करते हैं तो उनकी दिशा
उत्तर की तरह हो जाती है. वह उत्तर की ओर गति करते हैं.


उत्तरायण से देवताओं के दिन शुरू हो जाते हैं. मान्यता है इस दिन
स्वर्ग के द्वार खुल जाते हैं. इसलिए ये दिन विशेष माना गया है.


कहते हैं सूर्य देव उत्तरायण होते ही पृथ्वी प्रकाशमय हो जाती है. इस
प्रकाश में शरीर का त्याग करने से व्यक्ति का पुनर्जन्म नहीं होता.


भीष्म पितामह का शरीर शत-विक्षत होने पर उन्होंने प्राण त्यागने के
लिए उत्तरायण का इंतजार किया, ताकि उन्हें मोक्ष मिल सके.