मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल का इतिहास बहुत दिलचस्प है जो पहले नवाबों का शहर था



1956 में मध्य प्रदेश का गठन हुआ और राजधानी बनाने का सवाल उठ खड़ा हुआ



शुरुआत में इंदौर और ग्वालियर को राजधानी बनाने की मांग थी लेकिन बाद में भोपाल चुना गया



भोपाल में सबसे ज्यादा सरकारी भवन थे जिससे इसे राजधानी बनाने का निर्णय लिया गया



भोपाल रियासत के नवाबों की मनमर्जी के कारण यहां कई राजनीतिक गतिविधियां चल रही थीं



नवाबों के विरोध और उनके रुख को देखते हुए भोपाल को राजधानी बनाने का कदम उठाया गया



यह फैसला इसलिए लिया गया ताकि प्रदेश की सरकार आसानी से काम कर सके



आज भी भोपाल के पुराने भवनों में कई सरकारी दफ्तर काम कर रहे हैं



भोपाल की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और पुराने भवन आज भी शहर के महत्वपूर्ण हिस्से हैं



इस तरह भोपाल, जो पहले नवाबों का शहर था अब मध्य प्रदेश की राजधानी बन गया.