हम सभी बचपन से अकबर-बीरबल की कहानियां सुनकर बड़े हुए हैं. बीरबल तेज दिमाग के और बेहद चतुर व्यक्ति थे.



मुगल बादशाह अकबर के नवरत्नों में से एक बीरबल का असली नाम महेश दास था और वह बादशाह अकबर के प्रमुख वजीर थे



बीरबल उर्फ महेश दास दुबे का जन्म सन् 1528 में महर्षि कवि के वंशज भट्ट ब्राह्मण परिवार में हुआ था



बीरबल की माता अनाभा देवी ने 1528 में जुड़वा बच्चों को जन्म दिया था, जिनके नाम रघुबर दास और महेश दास रखे गए.



बीरबल का गांव आज के समय में मध्य प्रदेश के सीधी जिले में पड़ता है. कुशाग्र बुद्धि के बीरबल ने अपने गांव घोघरा में सिद्धि पाई थी



घोघरा गांव सीधी जिला मुख्यालय से 25 किलोमीटर की दूरी पर है. यहां माता चंद्रिका का मंदिर है जहां बीरबल ने सिद्धि प्राप्त की थी



इसके बाद वे अकबर के नव रत्नों में शामिल हो गए और मुगल राजा के सलाहकार बने



कहा जाता है कि बीरबल बचपन से मां चंद्रिका के भक्त थे और सूर्योदय पर सोन नदी में माता चंद्रिका को जल चढ़ाते थे



उनकी इस सेवा से खुश होकर मां ने उन्हें आशीर्वाद दिया था, जिसके बाद वह अपनी बुद्धिमत्ता के लिए प्रसिद्ध हुए



बीरबल को आज भी अपनी हाज़िर जवाबी और लोगों को लाजवाब कर देने की कुशलता के लिए याद किया जाता है.