वेद पुराणों में धरती के नीचे भी 7 लोक होने का वर्णन किया गया है.

इन सात लोक के नाम हैं- अतल, वितल, सुताल, रसातल, तलातल, महातल और पाताल लोक.

अतल लोक में 96 तरह की माया रचने वाली माया के पुत्र बाला का वास है.

वितल लोक में शिव का रूप हटकेश्वर का वास है.

कहा जाता है कि, वितल लोक में हटकी नदी बहती है.

सुताल में पवित्र राक्षस राजा बलि रहते हैं. इन्हें इस लोक में विष्णुजी ने ही भेजा था.

सातल लोक में ऐसे असुरों का वास है, जो देवताओं को परेशान करते हैं.

तलातल लोक में मायाजाल के राजा असुर माया का निवास है. ये असुरों के वास्तुकार हैं.

महातल में ऋषि कश्यप की पत्नी कद्रु से पैदा हुए अनेकों सिर वाले तक्षक, खुक और कालिया आदि नाग रहते हैं.

अंतिम लोक पाताल लोक में भूमि स्वर्णमय है. यहां शेषनाग, मत्स्य कन्याएं आदि का वास है.