दिल्‍ली में दो तरह का इतिहास बसता है

एक इतिहास को जहां चमक मिली तो दूसरा आज तक अपनी पहचान नहीं बना पाया है

हम बात कर रहे हैं हिजड़ों के खानकाह के बारे में

अगर आप कभी कुतुब मीनार जाएं, तो यह जगह बस यहां से कुछ ही दूरी पर है

यहां आपको कम से कम 50 कब्रें देखने को मिलेंगी

खानकाह हिजड़ों के लिए अध्‍यात्‍म से जुड़ने का एक तरीका है

किन्‍नर अक्‍सर समुदाय में या अकेले यहां गुरुवार के दिन दुआ पढ़ने आते हें

इस दिन वे गरीबों को खाना भी बांटते हैं

चूंकि उनके लिए यह जगह बहुत मायने रखती है

इसलिए कुछ सालों से इस जगह की रक्षा भी किन्नर लोग ही कर रहे हैं