उत्तराखंड हमेशा से ही अपने आदमखोर बाघ के लिए भी मशहूर रहा है

बात सन 1918 की है, ये प्रथम विश्व युद्ध का दौर था

इस दौरान जब पूरी दुनिया युद्ध की मार झेल रही थी

तब उत्तराखंड के वासी एक ‘आदमखोर बाघ’ की दहशत में जी रहे थे

जिम कॉर्बेट ने अपनी किताब में बाघों के आदमखोर बनने के पीछे की वजह बताई थी

उन्होनें बताया कि,प्रथम विश्व युद्ध के दौरान फैले इन्फ्लुएंज़ा बुखार कि वजह से बाघ बने थे आदमखोर

उस दौरान इस बुखार ने उत्तराखंड के गढ़वाल में हज़ारों लोगों की जान ले ली थी

ब्रिटिश सरकार इस आदमखोर बाघ से इतना परेशान हो गई थी कि

इसे मारने के लिए अखबारों में विज्ञापन निकलना पड़ा था

सुप्रसिद्ध शिकारी जिम कॉर्बेट ने 2 मई 1926 को इस आदमखोर बाघ को मार गिराया था.