भैरव की सवारी कुत्ता है, जो निष्ठा और सुरक्षा का प्रतीक माना जाता है.
इन्हें रात्रि का देवता कहा गया है और उनकी आराधना का सर्वोत्तम समय रात 12 से 3 बजे तक माना गया है.
राहु और केतु से उत्पन्न परेशानियां भी दूर होती है.
जैसे इमरती, दही बड़े आदि का भोग लगाना शुभ माना गया है.
इनके पूजन से परिवार की सुरक्षा होती. भैरव को तंत्र के महान देवता कहा गया है.
व्यक्ति काशी में प्रवेश या प्रस्थान नहीं कर सकता. वे न्यायप्रिय देवता हैं.
भैरव ब्रह्म कवच का पाठ अत्यंत फलदायी होता है.
फल, फूल और मिठाई अर्पित करें. सरसों के तेल का दीपक जलाकर काल भैरव अष्टक का पाठ करें और भैरव मंत्रों का जाप करें.
मिट्टी का दीपक आवश्यक होता है. पूजा के दौरान ॐ कालभैरवाय नमः मंत्र का जाप करें.