भगवान काल भैरव हिंदू धर्म में अत्यंत पूजनीय देवता हैं. उन्हें भगवान शिव का गण माना गया है.

भैरव की सवारी कुत्ता है, जो निष्ठा और सुरक्षा का प्रतीक माना जाता है.

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भैरव देवता को चमेली का फूल अत्यंत प्रिय है. इसलिए उनकी पूजा में चमेली के फूल और सुगंधित तेल का विशेष महत्व होता है.

इन्हें रात्रि का देवता कहा गया है और उनकी आराधना का सर्वोत्तम समय रात 12 से 3 बजे तक माना गया है.

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यदि किसी व्यक्ति की जन्मकुंडली में मंगल दोष है, तो भैरव की पूजा से यह दोष शांत होता है.

राहु और केतु से उत्पन्न परेशानियां भी दूर होती है.

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भैरव की पूजा में काली उड़द और उड़द से बने पकवान

जैसे इमरती, दही बड़े आदि का भोग लगाना शुभ माना गया है.

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भैरव की आराधना से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है.

इनके पूजन से परिवार की सुरक्षा होती. भैरव को तंत्र के महान देवता कहा गया है.

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भैरव देवता को काशी नगरी का कोतवाल कहा जाता है. मान्यता है कि उनकी अनुमति के बिना कोई भी

व्यक्ति काशी में प्रवेश या प्रस्थान नहीं कर सकता. वे न्यायप्रिय देवता हैं.

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भैरव तंत्रोक्त, बटुक भैरव कवच, काल भैरव स्तोत्र और बटुक

भैरव ब्रह्म कवच का पाठ अत्यंत फलदायी होता है.

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सुबह स्नान कर शरीर और मन को शुद्ध करें. अपने घर विशेषकर पूजा स्थान को साफ करें. वेदी पर भगवान काल भैरव की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें. उन्हें सफेद चंदन का तिलक लगाएं,

फल, फूल और मिठाई अर्पित करें. सरसों के तेल का दीपक जलाकर काल भैरव अष्टक का पाठ करें और भैरव मंत्रों का जाप करें.

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भैरव पूजन के लिए बेलपत्र, दूध, ऋतु फल, फूल, धूप, गंगाजल, शुद्ध जल, चंदन, काला कपड़ा, अक्षत, सरसों का तेल और

मिट्टी का दीपक आवश्यक होता है. पूजा के दौरान ॐ कालभैरवाय नमः मंत्र का जाप करें.

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